चिंता करने से परेशानियाँ बढ़तीं हैं,
ख़ामोश रहने से कम होती हैं ,
भगवान को याद करने से खुशियों में बदल जाती हैं ।
(अंजना)
बोलने से पहले वचन आदमी के गुलाम होते हैं,
बोलने के बाद आदमी वचनों का ।
(सुरेखा – भोपाल)
अपने में भावित, दूसरों से अप्रभावित रहने वाला ही, सहज रह पाता है ।
जो भी दिख रहा है वह आत्मा नहीं ।
जो देख रही है, वह आत्मा है ।
व्यवहारिक दृष्टिकोण – अच्छा दिखूँ,
आध्यात्मिक दृष्टिकोण – अच्छा बनूँ ।
जो रोज़ मरता है (पर दुखी नहीं होता),
वह मर्द ।
परीक्षा की ज़िंदगी में सफलता इतनी महत्त्वपूर्ण नहीं,
जितनी ज़िंदगी की परीक्षा में ।
संस्थाऐं भी शरीर की तरह बूढ़ी होती रहतीं हैं ।
समाधान है-
परिवर्तन,
तब ये हमेशा युवा रह सकतीं हैं ।
गृहस्थ का खाली मन शैतान का,
साधु का खाली मन भगवान का ।
जो आत्मा में रमे सो “राम”,
और जो विषयों में रमे सो “हराम” ।
एक मटका और गुलदस्ता साथ में खरीदा हो और घर में लाने के 3 दिन बाद 50 रुपये का मटका अगर फूट जाए तो हमें इस दुःख होता है, क्योंकि मटका इतनी जल्दी फूट जायेगा ऐसी हमें कल्पना भी नहीं थी,
पर गुलदस्ते के फूल जो 200 रुपये के थे, वो शाम तक मुरझा जाँए तो भी हम दुःखी नहीं होते, क्योंकि ऐसा होने वाला ही है, यह हमें पता ही था ।
जिससे जितनी अपेक्षा ज़्यादा,
उसकी तरफ से उतना दुःख ज़्यादा ।
(अरविंद)
(प्रियजनों के विछोह पर भी दुःख इसीलिये होता है क्योंकि हम उनसे विछोह की अपेक्षा नहीं रखते)।
कड़वी गोलियाँ चबाई नहीं, निगली जाती हैं ।
उसी प्रकार जीवन में अपमान,असफलता ,धोखे जैसी कड़वी बातों को सीधे गिटक जाऐं…
उन्हें चबाते रहेंगे यानि याद करते रहेंगे तो जीवन कड़वा ही रह जाएगा ।
(सुरेश)
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