हिंसा में यदि किसी को भलाई दिखती भी है तो वह अस्थायी ही होगी,

पर बुरायी, हमेशा स्थायी होती है ।

महात्मा गाँधी

इनसान अपने शरीर की
“शुगर” तो हर समय ही
चैक कराता रहता है ।
अगर वह अपनी जीभ
की “कड़वाहट” को भी
चैक करवाये तो …
परेशानीयाँ ही खत्म हो जायें ।

“वाणी” को “वीणा” बनाएं,   “बाण” न बनाएं।
“वीणा” बनेगी तो जीवन में संगीत होगा ,
“बाण” बनेंगे तो जीवन में महाभारत होगा !

(आर.के.गुप्ता)

परेड में “About Turn” बोलते ही,
पहला आदमी आख़िरी और आख़िरी आदमी पहले नंबर पर आ जाता है।

जीवन में कभी आगे होने का घमंड
और आख़िरी होने का ग़म न करें,
पता नहीं कब ज़िंदगी “About Turn” बोल दे।

(आर.के.गुप्ता)

आज़ाद रहना चाहते हो तो दूसरों को गुलाम मत बनाओ,
दूसरों* की गुलामी मत करो ।

*क्या हम अपने ही सेवकों / अपनी आदतों और अपनी सुविधाओं के गुलाम नहीं हैं ?

चिंतन

नदी में गिरने से किसी की जान नहीं जाती,
जान तभी जाती है जब तैरना नहीं आता ।

परिस्थितियाँ कभी समस्या नहीं बनतीं,
समस्या तभी बनती है जब हमें परिस्थितियों से निपटना नहीं आता ।

(सुरेश)

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