एक बार अंगूर ????????????खरीदने के लिए एक फल बेचने वाले के पास रुका..
पूछा:
क्या भाव है गुच्छों???????????????????????????? का ?
बोला :
80 रूपये किलो ।
पास ही कुछ अलग-अलग टूटे हुए अंगूरों के दाने पड़॓ थे ।
मैंने पूछा :
क्या भाव है इन का ?
वो बोला :
30 रुपये किलो
मैंने पूछा :
इनका इतना कम दाम क्यों..?
वो बोला :
साहब, हैं तो ये भी बहुत बढ़िया
पर अपने गुच्छे से टूट गए हैं ।

मैं समझ गया कि अपने संगठन/समाज और परिवार से अलग होने पर हमारी कीमत आधे से भी कम रह जाती है।

एकता में बल है ।

(अरविंद)

 

ज्ञान से चलने वाले को शून्य होना पड़ता है,
और
प्रेम से चलने वाले को पूर्ण।

लेकिन
शून्यता और पूर्णता एक ही घटना के दो नाम हैं।
शून्य से ज़्यादा पूर्ण और कोई चीज़ नहीं है,
और
पूर्ण से ज़्यादा शून्य कोई और चीज़ नहीं है।

(नीलम)

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April 8, 2022

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