गन्ने में जहाँ गाँठ होती है वहाँ रस नहीं होता,
जहाँ रस होता है वहाँ गाँठ नहीं होती ।

बस, जीवन भी ऐसा ही है यदि मन में किसी के लिये नफ़रत की गाँठ होगी तो हमारा जीवन भी बिना रस का बन जायेगा…..

(आर.के.गुप्ता)

* धन तभी सार्थक है,
जब धर्म भी साथ हो।

* विशिष्टता तभी सार्थक है,
जब शिष्टता भी साथ हो।

* सुंदरता तभी सार्थक है,
जब चरित्र भी शुद्ध हो।

* सम्पति तभी सार्थक है,
जब स्वास्थ्य भी अच्छा हो।

* देवस्थान गमन तभी सार्थक है,
जब हृदय में भाव हो।

* विद्वता तभी सार्थक है,
जब सरलता भी साथ हो।

* प्रसिद्धि तभी सार्थक है,
जब मन में निरअहंकारिता हो।

* बुद्धिमता तभी सार्थक है,
जब विवेक भी साथ हो।

* परिवार का होना तभी सार्थक है,
जब उसमें प्यार और विश्वास हो।

(नमिता-सूरत)

मनुष्य का अपना क्या है..!?

– जन्म : दूसरों ने दिया,
– नाम : दूसरों ने रखा,
– शिक्षा : दूसरों ने दी,
– रोजगार : दूसरों ने दिया,
और . . .
– शमशान : दूसरे ले जाऐँगे.

-तो व्यर्थ मेँ घमंड़ किस बात पर करते हैँ लोग ??

(श्रीमति एकता – पुणे)

अंग्रेज़ ने पूछा:
भारतीय स्त्रियाँ हाथ क्यों नहीं मिलाती हैं?
स्वामी विवेकानंद जी ने जवाब दिया…
क्या आपके देश में कोई साधारण व्यक्ति
आपकी महारानी से हाथ मिला सकता है ??
अंग्रेज़- “नहीं”
स्वामी विवेकानंद-
हमारे देश में हर एक स्त्री महारानी होती है।

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April 8, 2022

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