विदेशियों से देश को आज़ाद कराना, द्रव्यात्मक था।
संकीर्णताऔं/विकारों से, भावनात्मक/असली/बहुमूल्य ।

चिंतन

भक्त ,सूर्य देव (जो बादल से ढके हुये थे) को जल चढ़ा रहा था।
सूरज तो दिख नहीं रहे ?
अभी नहीं दिख रहे, पर हैं तो !
आज न सही, कल ,कल न सही ,परसों दिख जायेंगे!!

चिंतन

इतिहास कहता है – भूत में सुख था,
विज्ञान का कहना है – भविष्य में सुख होगा,
धर्म का कहना – आज में सुख है।
आज का सुख, भूत और भविष्य को भी सुखी कर देगा।

श्रीमती सुनीति(चिंतन)

– “आज” में “आ” सुख को आमंत्रण देता है,
“ज” भूत को इंगित करता है।

जो पत्थर छैनी/हथौडों की चोट से टूट जाते हैं,
उन्हें फर्श पर बिछा दिया जाता है और पैरों से कुचल जाते हैं।
जो सह लेते हैं ,वे भगवान(मूर्ति) बन जाते हैं/पूजे जाते हैं।

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April 8, 2022

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