1991 के मुक्तागिरी के चातुर्मास में आचार्य श्री विद्यासागर जी ने मुनियों को सम्बोधन दिया…
दुर्भाग्य है कि पंचमकाल में आहार के लिए रोज़ उठना पड़ता है, पर कम से कम मन से तो मत उठो।
आचार्य श्री समयसागर जी</span
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2 Responses
आहार का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। मुनियों के लिए कहा गया है कि मन से कम कम उठने का प़यास करना उचित नहीं है यानी आहार के लिए मन से उठना उचित नहीं है।
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आहार का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। मुनियों के लिए कहा गया है कि मन से कम कम उठने का प़यास करना उचित नहीं है यानी आहार के लिए मन से उठना उचित नहीं है।
Acharya Shri ke charnon me shat shat naman !