अपने मकान/ मच्छरदानी में एक छोटे से मच्छर का भी प्रवेश वर्जित है।
अपनी आत्मा में दुश्मनों का भी प्रवेश वर्जित नहीं !
चिंतन
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प़वेश का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए अपनी आत्मा में दुश्मन यानी विकार जेसे क़ोध, लोभ, मौह आदि न प़वेश नहीं करना चाहिए।
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प़वेश का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए अपनी आत्मा में दुश्मन यानी विकार जेसे क़ोध, लोभ, मौह आदि न प़वेश नहीं करना चाहिए।
Isse pata chalta hai ki hum apni aatma ko kitna casually treat karte hai ! Wonderful post !