साँस
साँस ही जीवन है। जितनी अधिक साँस व्यय करेंगे उतना जीवन नष्ट होगा।
यदि प्राणायाम नहीं कर सकते तो लम्बी-लम्बी गहरी साँस लें।
निर्यापक मुनि श्री नियमसागर जी</span
साँस ही जीवन है। जितनी अधिक साँस व्यय करेंगे उतना जीवन नष्ट होगा।
यदि प्राणायाम नहीं कर सकते तो लम्बी-लम्बी गहरी साँस लें।
निर्यापक मुनि श्री नियमसागर जी</span
One Response
सांस का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए प़ाणायाम करना या लम्बी लम्बी सांस लेना परम आवश्यक है। सांस के लिए ध्यान करना आवश्यक है।