Category: डायरी
प्रतिस्पर्धा
दो जुड़वां भाइयों के सब कुछ एक सा होते हुए भी,भाग्य अलग-अलग क्यों? क्योंकि पूर्व संचित कर्म अलग-अलग होते हैं, जिन्हें कोई जानता नहीं। फिर
साथ
जब तन साथ नहीं जाता तो सन (Son) कैसे जायेगा ! पति नहीं जायेगा पर पाप ज़रूर साथ जायेगा। चिंतन
दान में स्वाधीनता
दान देने में भी आनंद तभी आता है जब आप स्वाधीन हों, जैसे भिखारी को खिलाते समय कोई प्रतिक्रिया की अपेक्षा नहीं सो खिलाने में
रिश्ते
जैसे जैसे पैसा बढ़ता जाता है शून्यता बढ़ती जाती है –> 10, 100, 1000….। इसलिये बुजुर्गों ने 11, 101, 1001, देने का रिवाज बनाता था।
Lack of confidence
Lack of confidence के कारण ? हो पायेगा (भविष्य का भय) ! या हो गया था (भूत के दुखद अनुभव) यही हमारी गाथा है, आत्मविश्वास
निरीहता
आचार्य श्री विद्यासागर जी से किसी गृहस्थ ने कहा… हम तो श्रावक हैं, आपके दर्शन करते समय भी कुछ अपेक्षाएं रखते हैं। पर आपकी निरीहता
ज्ञान
अज्ञानी बच्चे हाथी के आगे-आगे चलते हैं (हाथी जो ज्ञान का प्रतीक है और अज्ञानी बच्चे मान के)। वही बच्चे पागल के पीछे-पीछे ताकि उसे
सत्य
आचार्य श्री विद्यासागर जी कहा करते थे… झूठ यदि सफ़ेद हो सकता है तो सत्य को कड़वा कहने में क्या दुविधा ! पर सत्य होता
आदमियत
एक आदमी था। राजा बनते ही आदमी मर गया, राजा जीता रहा। ब्र. डॉ. नीलेश भैया
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