Category: डायरी

पुरुषार्थहीन

जिनको लगता है कि उनके फैसले रब करेगा, वे बैठे हैं कि अब करेगा-अब करेगा। (ब्र. डॉ. नीलेश भैया)

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कृतघ्न

कृत = किया हुआ। हन = हंता/ विनाशक। कृतघ्न = जो किए गए उपकार को नकार दे। (कमल कांत)

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विचार / विकार

विचारों की यदि दिशा भटक जाए तो वह विकार बन जाते हैं। एक बुढ़िया की कुटिया पड़ोसी ने हड़प ली। बुढ़िया ने निवेदन किया कि

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प्रचलित वस्तुएँ

कुम्हार अपने 5 गधों पर 5 सामग्रियाँ Overload करके रोज़ाना बेचने जाता था। अत्याचार –> राजा आदि के लिए। अहंकार –> सेठ आदि, नये धनपतियों

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दुर्जन

साँप को साँप कहो या साँप जी, वह तो डसेगा ही। क्रिस्टोफ़र नोलन

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मापदंड

राजा के प्रिय मंत्री की गलती पर राजा को सजा तो देनी ही थी। सैनापति की राय थी – 1 लाख मुद्रा 100 कोड़े, सैनिक

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साधु

काँपते हाथों को रोकने के लिये कहते हैं…. “साधो”। साधु वही जो विचलित होते मन को साध ले। ब्र. डॉ. नीलेश भैया

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मंगल आशीष

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