Category: डायरी

मंदिर

जब कण-कण में भगवान है तो मंदिर जाना क्यों ? हवा तो धूप में भी पर उसका आनंद छाँव में ही क्यों / कार में

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मोक्ष

सांकृत्यायन जी ने लिखा है…मोक्ष घुमक्कड़ों को ही होता है। क्योंकि उनका कोई व्यक्तिगत/ स्थायी ठिकाना नहीं होता, बहुत दिन ठहरे पानी में तो कीड़े

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पाप / पुण्य

शिष्य…कौन सी आदत अच्छी, कौन सी बुरी और यह जीवन में कैसे आती हैं ? गुरु ने कुटिया के एक तरफ औषधि के पौधे बुववाये,

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उपकार

एक गाँव में सब स्वस्थ। सम्मान करने अधिकारी आये। पर एक व्यक्ति मरियल सा दिखा। ये कौन है ? ये गाँव का डॉक्टर है। आचार्य

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धन

धन का संबंध तो हमेशा परेशानी के साथ ही रहता है। कम हो तो दिन में परेशानी, ज्यादा हो तो रात में। (एन. सी. जैन

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आलस / हिंसा

विचार किया !… जरा से आलस से (बिजली न जलाना/ लापरवाही से चलना) हम अपने जूतों के नीचे कितने कीड़ों की लाशों को लेकर घूम

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मृत्यु में वेदना

क्या मृत्यु में वेदना होती है? (एन. सी. जैन – नोयडा) नहीं बीमारी/ Accident की वेदना हो सकती है। पक्षियों आदि को देखें कितनी शांति

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मंगल आशीष

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