Category: डायरी

शरीर

शरीर को पूज्य बनाने के दो तरीके… 1) शरीर को पूरा अपना मानो। तब ऐसे काम होंगे ही नहीं कि कोई निरादर कर पाए। 2)

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सम्मान

त्याग की मूर्तियों के सामने गृहस्थों का सम्मान करना कहाँ तक उचित है ? त्यागियों के सामने त्याग का सम्मान करना तो तर्कसंगत है ही

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सुंदरता

प्रगति/ बढ़ते हुए को अच्छा माना जाता है, सुंदर कहा जाता है पर ढलता हुआ सूरज क्यों ज्यादा सुंदर लगता है ? योगेंद्र आध्यात्मिक/ परिपक्व

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ध्यान / इच्छा

कहते हैं जिसका ध्यान करो वह मिल जाता है, अनुभव कहता है ज़रूरी नहीं। जैसे दो मित्र एक ही ऑफिस में थे, एक सोचते हुए

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प्लास्टिक

प्लास्टिक, पर्यावरण के लिए तो सबसे नुकसान दायक चीज तो है ही; धर्म के अनुसार भी प्रयोग करने लायक नहीं है, हिंसक/ अपवित्र है। खाद्य

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अंतरंग

जब तक सर्प पिटारे के अंदर रहता है उसकी पूजा होती है, बाहर आने पर पिटायी। मनुष्य जब तक अपने में रहता है, लोगों का

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खुशनसीब

खुशनसीब वह नहीं जिसका नसीब अच्छा है बल्कि वह जो अपने नसीब को अच्छा मानता है। (महेन्द्र – नयाबाज़ार मंदिर)

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परिग्रह

संग्रह गृहस्थ के लिए आवश्यक है लेकिन उसे संग्रह के प्रति यदि मूर्छा आ जाती है तो वह परिग्रह का रूप धारण कर लेती है।

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उत्साह

एक आदमी मरा 35 साल में (उत्साह मर गया), दफनाया गया 70 साल पर (आयु पूर्ण होने पर)। ब्र. डॉ. नीलेश भैया

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आचरण

मन और पानी का एकसा स्वभाव होता है… जिन परिस्थितियों/ बर्तन में जाता है इसी का आकार ग्रहण कर लेता है। दूसरा… जहाँ ढलान मिल

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मंगल आशीष

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