Category: डायरी

शिविर समापन समारोह

जीवन विकास के 10 दिवसीय शिविर के समापन पर संबोधन करते हुए कहा… व्यवस्थाएं चुस्त भी, सुस्त भी रहीं पर कुल मिलाकर मस्त रहीं। अपने

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उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म

जो आत्मा में विचरण करता, वह इंद्रियों के विचलन से बचता। इंद्रियों की दासता समाप्त होते ही आत्मा में विचरण शुरू हो जाता। देर तक

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उत्तम आकिंचन्य धर्म

“कुछ भी मेरा नहीं” होने के भाव को ही आकिंचन्य कहते हैं। हल्का होना ऊपर उठना सिखाता है, बाह्य तथा अंतरंग धारणाओं से भी। एक

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उत्तम त्याग धर्म

राग धूप है तथा त्याग छाँव। त्याग तो अवश्यम्भावी है,स्ववश किया तो आनंद परवश किया तो छटपटाहट। आचार्य ज्ञान सागर बताते थे… जो त्याग परवश

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उत्तम तप धर्म

कर्मों को क्षय करने के लिए जो किया जाए उसे तप कहते हैं। गृहस्थों के लिए आजकल एक बड़ा तप है… सुबह जल्दी उठना। निशाचर

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उत्तम संयम धर्म

फिटकरी का केमिकल फार्मूला,K2SO4.AI2(SO4)3.24H2O है। इतना कठिन सूत्र कितने सालों के बाद याद कैसे रहा ? लिखने लिखते ही आता है लिखने का हुनर, बच्चे

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उत्तम सत्य धर्म

क्रोध, लोभ, भय और हँसी को त्यागने तथा शास्त्र के अनुसार वचन बोलने पर ही सत्य कहा जा सकता है। आचार्य श्री विद्यासागर जी कहा

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उत्तम शौच धर्म

संतोष से निरुत्साह नहीं, क्योंकि संतोष उत्साह और उमंग की पूर्णता है। पास में रखी वस्तु जब बोझ लगे तब बोध में संतोष आता है।

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उत्तम आर्जव धर्म

जितना आडंबर ज्यादा, उतनी उलझनें बढ़ती हैं। एक बार बाहर दिखाने का क्रम बन गया फिर वह दिखावा आपकी मजबूरी बन जाता है। दिखावे वाले

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उत्तम मार्दव धर्म

मान रूपी बीज को जब माटी में मिलायेंगे तब सम्मान रूपी वृक्ष तैयार होगा। मेरा अपमान न हो जाए इसकी तो बहुत चिंता, पर मैं

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मंगल आशीष

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