Category: डायरी

वृद्ध

वृद्ध काँच के जार में रखी गोल्डफिश जैसे होते हैं। हर एक की निगाह उन पर होती है। इसलिए उनको अपने आचरण के प्रति बहुत

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त्याग

त्याग से ही व्यक्ति बड़ा/ महान बनता है, भोग से नहीं (नीचे ही जाता है)। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी

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आत्मा / परमात्मा

जब आत्मा और परमात्मा दोनों अंदर ही हैं तो उनके मिलने का रास्ता भी तो अंदर ही होगा न ! (मंजू रानीवाल)

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जिंदा

हम शरीर से ही पूरे जिंदा दिखते हैं। मन से आधे (क्योंकि कोई भी हमारा मन तोड़ जाता है)। आत्मा से तो हम पूरे ही

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संसार

कत्ती* सूत भिगोकर लाई, बनिया ने मारी बट्टी**। बनिया कहे मैंने कत्ती लूटी, कत्ती कहे मैंने बनिया। प्रभात जैन की दादी जी * चरखे पर

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आश्रम

राग से निवृत्ति के लिये ——–> वानप्रस्थ आश्रम। वीतरागता में प्रवृत्ति के लिये –> व्रती आश्रम।

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सुख-दु:ख / आदत

सुख-दु:ख तथा आदत में क्या संबंध है ? गरीब को महल में नींद नहीं दुखी, अमीर झोंपड़ी में नींद नहीं तो दुखी। ब्र. डॉ. नीलेश

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मंगल आशीष

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