Category: डायरी
बंध / अबंध
भगवान महावीर से उनके सबसे बड़े शिष्य गौतम जी ने पूछा… आप भी इस संसार में, मैं भी; पर आप अबद्ध (संसार/ कर्मों से), मैं
निवेश
अपने अस्तित्व को बनाये रखने के लिये धनोपार्जन आदि क्षेत्रों में निवेश करते रहते हैं। शुद्ध विचारों का निवेश नहीं करेंगे तो शुद्ध का उत्पादन
निजता
दूसरा (जैसा) बनने के लिये की खुद/ निजता की हत्या करनी पड़ती है। फिर भी दूसरे तो बन नहीं पाते। दूसरे को आदर/ प्रमुखता देने
धर्म / धर्मात्मा
धार्मिक क्रियाएँ तो बहुत लोग बहुत सारी करते हैं पर धर्मात्मा वही जो सुख (पुण्योदय) में दुःखी हो (कि भोगना पड़ रहा है) तथा दुःख
मूल / भूल
मूल पर नज़र न रखना ही बड़ी भूल है। मूल पर नज़र तभी जाती है जब नज़र शुद्ध हो। नज़र शुद्ध कैसे हो ? नज़र
ज्ञान
बड़ों के अनुभव पर आधारित कहानी किस्सों से छोटों को आसानी/ रुचि के साथ ज्ञान ग्राह्य हो जाता है। ये आधारित होती हैं धूप, छाँव
सापेक्ष
सापेक्ष… तीन मित्र घूमने निकले। घोंघा कछुए की पीठ पर, शिकायत करता रहा –> धीरे चलो। साथ में खरगोश को कछुए से शिकायत थी ——>
Advice
Good advice is always certain to be ignored, but that’s no reason not to give it. J. L. Jain (Agatha Christie)
भगवान का घर
अपने घर को अपना न कहकर भगवान का कहने से घर में गलत काम नहीं हो पायेंगे। जैसे मन्दिर में नहीं कर पाते।
मोह
मोह रूपी छोटा सा काग़ज़ भी आँख के क़रीब रखने से, वह पहाड़ जैसे बन जाता है। जिसके पीछे पूरा संसार ढक जाता है। सुख
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