Category: डायरी
उत्तम आकिंचन्य धर्म
“कुछ भी मेरा नहीं” आकिंचन्य और इस भाव का आना आकिंचन्य-धर्म। भीड़ में रहकर अपने नीड़ में रहना आकिंचन्य। अनुलोम-विलोम में साँस का ग्रहण और
उत्तम त्याग धर्म
जीवन में संयम धारण करने के बाद त्याग के भाव आना चाहिए/ आते ही हैं। दान के लिए धन संग्रह समझदारी नहीं। यह तो ऐसा
उत्तम तप धर्म
“इच्छा निरोध: तप:”, आचार्य विद्यासागर जी कहते थे -> “अपेक्षा निरोध: तप:।” शरीर की वयस्कता उम्र से, मन की तप से। तप से रसायन आदि
उत्तम संयम धर्म
कषायों को मंद करने के बाद ही सत्य प्रकट होता है और सत्य हाथ से फिसल न जाए उसके लिए संयम रखना पड़ता है/ संयम
उत्तम सत्य धर्म
चार कषायें जब समाप्त या मंद पड़ जाती हैं तब जीवन में सत्य प्रकट होता है। जो दिखता है वह सत्य नहीं, ना दिखने वाला
उत्तम शौच धर्म
लोभ का उल्टा शौच यानी पवित्रता। जितनी अपेक्षाएँ ज्यादा होंगी, उतना लोभ ज्यादा होगा। जिसके मन में लोभ आ जाए उसके आसपास का वातावरण खुशहाल
उत्तम आर्जव धर्म
मायाचारी का उल्टा/ मन वचन काय की एकरूपता आर्जव धर्म है। एक मासोपवासी(बहुत अंतराल के बाद आहार लेने वाले) मुनिराज तपस्या करके चले गए। उसी
उत्तम मार्दव धर्म
(धर्म और गुरु की ना मानना, मान है।) मान का विपरीत, अपने मान को मान ना देना, दूसरे के मान से आहत न होना मार्दव
अपेक्षा
10 आमों में एक और मिलाया तो कुल कितने हुए ? 12 कैसे ? 10 + 1 + 1 मेरे पास पहले से था। हम
निर्लिप्तता
महावीर मुनि अवस्था में एक गाँव में लंबे समय तक ध्यान तप करते रहे। गाँव वालों ने घास की झोपड़ी बना दी। गाँव वालों ने
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