Category: डायरी
मापदंड
राजा के प्रिय मंत्री की गलती पर राजा को सजा तो देनी ही थी। सैनापति की राय थी – 1 लाख मुद्रा 100 कोड़े, सैनिक
साधु
काँपते हाथों को रोकने के लिये कहते हैं…. “साधो”। साधु वही जो विचलित होते मन को साध ले। ब्र. डॉ. नीलेश भैया
रुलाना
रुलाना…. किसी को रुलाने का पाकीज़ा तरीका… हँसाओ इस क़दर कि पानी निकल आये, हम तो दुश्मन को भी पाकीज़ा सज़ा देते हैं। हाथ उठाते
वाकपटुता
नया व्यक्ति गाँव में पहुँचा। पूछा –> यहाँ के लोग कैसे हैं ? मैं ही ईमानदार हूँ (पूरे गाँव के बारे में कथन हो गया)।
विचार
अकेला कोई रहना नहीं चाहता। दो होते ही… तीन…चार। तालाब में पत्थर फेंकते ही एक, फिर अनेक लहरें उठ जाती हैं। ऐसे ही विचार एक
नकल
एक विद्यार्थी दूसरे को पीट रहा था। कारण ? दूसरे ने गलत जबाब लिखा था, पहला उसकी नकल कर रहा था। नकल करनी हो तो
सकारात्मक सोच
माली राजा को रोज़ाना फल लाकर देता था। राजा एक खाता/ रखता, दूसरा माली के ऊपर फेंकता। माली कहता “अच्छा हुआ”। पूछा, ऐसा क्यों कहता
दृष्टि
मोटे पेट वाला व्यक्ति गोल्फ़ खेलने गया। बॉल पास में रखी तो दिखी नहीं, दूर रखी तो वहाँ स्टिक पहुँचे नहीं। हमारी भी दूर/ दूसरों
सकारात्मकता
वैज्ञानिक आइंस्टीन की सालों की मेहनत अचानक प्रयोगशाला में आग लगने से समाप्त हो गई। आइंस्टीन…. अच्छा हुआ मेरी गलतियाँ समाप्त हो गईं, अब नये
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