Category: डायरी

अस्तित्व

दीवारों ने छत से कहा…तुम हम पर ही टिकी हो। छत ने कहा… तुम्हारी सुरक्षा मुझसे ही है। फर्श चुप ना रह सका बोला… मेरे

Read More »

माँ

दीपक (माँ रूप) पूरे घर को प्रकाशित करता है, पर दिया तले अंधेरा (माँ अपना ध्यान नहीं रखतीं)। उस अंधकार को दूसरे दीपक दूर कर

Read More »

परिवार

परिवार…. परि = चारों ओर से। वार = 1. आघात/ चोट पहुँचाना। 2. अवसर/ चोटी पर पहुँचाना। हम कैसा परिवार विकसित कर रहे हैं !

Read More »

व्यवहार / निश्चय

शुरू में व्यवहार अंत में निश्चय। एक बच्चा पिता के साथ मेला गया। बच्चा खिलौने के लिए जिद कर रहा था। थोड़ी देर में पिता

Read More »

कर भला हो भला

शिष्य… गुरुजी ! मकान की बहुत परेशानी है। कुछ तरकीब बताएँ। गुरु… एक घड़ा टेढ़ा करके पेड़ पर लटका दें। अगली साल तक एक मकान

Read More »

परेशानियाँ

शिष्य…”गुरु जी! बहुत परेशानियाँ है, नींद भी नहीं आती है, क्या करुँ ?” 100 ऊँट ले जा, जब सब बैठ जाएँ तब सो जाना। वह

Read More »

स्व-पर कल्याण

आगरा मंदिर के युवा श्री अमित का संस्मरण… जब मैं 17-18 साल का था। मंदिर में एक बूढ़ी माताजी ने मुझसे कहा…”मुझे दिखाई नहीं देता।

Read More »

जरूरत के चरण

जरूरत के चरण… भूख/ शरीर सम्बन्धित। सुरक्षा। परिवार/ संगति। सम्मान। आत्मनिष्ठ/ आत्मजागृति। पूर्व के दर्शन में भगवान राजाओं के पुत्र थे सो चार चरण पहले

Read More »

मंगल आशीष

Archives

Archives
Recent Comments

August 9, 2026

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930