Category: डायरी

सकारात्मक सोच

माली राजा को रोज़ाना फल लाकर देता था। राजा एक खाता/ रखता, दूसरा माली के ऊपर फेंकता। माली कहता “अच्छा हुआ”। पूछा, ऐसा क्यों कहता

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दृष्टि

मोटे पेट वाला व्यक्ति गोल्फ़ खेलने गया। बॉल पास में रखी तो दिखी नहीं, दूर रखी तो वहाँ स्टिक पहुँचे नहीं। हमारी भी दूर/ दूसरों

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सकारात्मकता

वैज्ञानिक आइंस्टीन की सालों की मेहनत अचानक प्रयोगशाला में आग लगने से समाप्त हो गई। आइंस्टीन…. अच्छा हुआ मेरी गलतियाँ समाप्त हो गईं, अब नये

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बंध / अबंध

भगवान महावीर से उनके सबसे बड़े शिष्य गौतम जी ने पूछा… आप भी इस संसार में, मैं भी; पर आप अबद्ध (संसार/ कर्मों से), मैं

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निवेश

अपने अस्तित्व को बनाये रखने के लिये धनोपार्जन आदि क्षेत्रों में निवेश करते रहते हैं। शुद्ध विचारों का निवेश नहीं करेंगे तो शुद्ध का उत्पादन

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निजता

दूसरा (जैसा) बनने के लिये की खुद/ निजता की हत्या करनी पड़ती है। फिर भी दूसरे तो बन नहीं पाते। दूसरे को आदर/ प्रमुखता देने

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धर्म / धर्मात्मा

धार्मिक क्रियाएँ तो बहुत‌ लोग बहुत सारी करते हैं पर धर्मात्मा वही जो सुख (पुण्योदय) में दुःखी हो (कि भोगना पड़ रहा है) तथा दुःख

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मूल / भूल

मूल पर नज़र न रखना ही बड़ी भूल है। मूल पर नज़र तभी जाती है जब नज़र शुद्ध हो। नज़र शुद्ध कैसे हो ? नज़र

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ज्ञान

बड़ों के अनुभव पर आधारित कहानी किस्सों से छोटों को आसानी/ रुचि के साथ ज्ञान ग्राह्य हो जाता है। ये आधारित होती हैं धूप, छाँव

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सापेक्ष

सापेक्ष… तीन मित्र घूमने निकले। घोंघा कछुए की पीठ पर, शिकायत करता रहा –> धीरे चलो। साथ में खरगोश को कछुए से शिकायत थी ——>

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मंगल आशीष

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