Category: डायरी

उत्तम क्षमा

जो नज़रें झुकाए चलते हैं, दुनिया उनको नज़रें उठाए देखती है जैसे आचार्य श्री विद्यासागर जी जब हावड़ा ब्रिज से निकल रहे थे उनकी नज़रें

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सत्य

अनुसंधान जब अतिसंधान बन जाता है तब सत्य, सत्याग्रह आंदोलन के रूप में परिवर्तित हो जाता है। तब सत्य पर ग्रहण लग जाता है, सत्य

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संहनन

आचार्य श्री विद्यासागर जी से पूछा – इतनी सर्दी में आप बिना कपड़ों के कैसे सह लेते हैं ? आचार्य श्री – गर्मियों में गर्मी

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Wisdom

“Knowledge decides what to say. Behaviour decides how to say. Talent decides how much to say. Wisdom decides whether to say or not.” (J.L.Jain)

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सत्य की परीक्षा

सत्य की ही परीक्षा क्यों होती है ? सत्य बोलना या सत्य बोलने का संकल्प लेने का मतलब… आपने हायर क्लास में जाने का फॉर्म

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रिश्ते

मैंने तो मज़ाक में रोकी थी अपनी साँस, रिश्ते खुले तो शर्म से मरना पड़ा मुझे। (अरविन्द)

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शांति

आचार्य श्री विद्यासागर जी के पास एक व्यक्ति को लाया गया जो सुसाइड करना चाहता था। आचार्य श्री स्वाध्याय कर रहे थे। वह व्यक्ति बैठा

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Empathy

अपने आप को सामने वाले की स्थिति में रखकर सोचना, Empathy कहलाता है। (एकता – पुणे)

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शिष्य / भक्त

आचार्य श्री विद्यासागर जी अपने शिष्यों और भक्तों को सिंह बनाते थे, इसलिए हंटर जैसा अनुशासन रखते थे, श्वान नहीं जिसको पट्टा डालकर घुमाया जाए।

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प्रतिध्वनि

हमारा संसार प्रतिध्वनियों का ही है, जिसे हम प्रतिपल जी रहे हैं। पाप कर्मों की भी प्रतिध्वनियां सताती हैं, क्रिया एक प्रतिक्रिया अनेक। यह सिद्धांत

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मंगल आशीष

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