Category: डायरी
सृष्टि की व्यवस्था
July 7, 2023
सृष्टि अनमोल ख़जानों से भरी है पर एक भी चौकीदार नहीं है। व्यवस्था ऐसी की गयी है कि अरबों लोगों के आवागमन के बावजूद कोई
दौलत
July 5, 2023
दौलत ऐसी तितली है जिसे पकड़ते-पकड़ते हम अपनों/ भगवान से दूर निकल जाते हैं। (सुरेश)
लोक मूढ़ता
June 30, 2023
मरी मछली ही धारा के साथ बहती है, ज़िंदा तो धारा के विपरीत भी। स्वामी विवेकानंद
ग्रहों का प्रभाव
June 16, 2023
ग्रह क्या करेंगे ! उतना ही मिलता है, जितना ले सकते हो (कर्मानुसार)।
बढ़ती उम्र
June 15, 2023
बढ़ती उम्र में दृष्टि कमजोर होने लगती है, लेकिन बहुत कुछ स्पष्ट दिखने लगता है। (अरुणा)
अच्छा
June 13, 2023
यदि आपको कोई अच्छा लग रहा है तो मानकर चलिये कि वह अच्छा हो भी सकता है अथवा ना भी हो, पर आप अच्छे अवश्य
बोल
June 10, 2023
बोलना तो सभी को आता है। किसी की ज़ुबान बोलती है, किसी की नियति; पर जब इन लोगों का “समय” बोलता है तब इनकी बोलती
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