Category: डायरी
पवित्रता
शरीर कभी भी पूरा पवित्र नहीं हो सकता, फिर भी सभी इसकी पवित्रता की कोशिश करते रहते हैं ! मन पवित्र हो सकता है, मगर
स्वाध्याय
जिस पदार्थ को स्वयं जानते हैं, उस पदार्थ को भी गुरुजनों से पूछना चाहिए; क्योंकि उनके द्वारा निश्चय को प्राप्त कराया हुआ पदार्थ परम सुख
धर्म / पाप
धर्म पापीओं को नहीं बचाता, पाप से बचाता है । इसलिये पाप के उदय में और-और धर्म करें ताकि और-और पाप का उदय ना आये
ग़लती
ज़िंदगी में ग़लती से कुछ ग़लत हो जाये तो घबराना मत क्योंकि… दूध फटने से,वही घबराते हैं… जिन्हें पनीर बनाना नहीं आता । (अनुपम चौधरी)
क्रोध
क्रोध और आंधी दोनों बराबर होते हैं ! शांत होने के बाद ही पता चलता है कि कितना नुकसान हो गया है !! (सुरेश)
बंध / निर्ज़रा
बंध तो हमेशा होता ही रहता है, लेकिन जिनेंद्र भगवान की भक्ति करते समय ऐसी प्रकृतिओं का बंध होता है, जो बंध को काटने में
छह आवश्यक
छह आवश्यकों में व्यस्त होना बहुत पुण्य का उदय, और संयम भी माना जाता है । आचार्य श्री विद्यासागर जी
कठिन / आसान
सबसे कठिन आसन है….आश्वासन, सबसे लंबा श्वास …….विश्वास, सबसे कठिन योग …… वियोग, और सबसे अच्छा योग है.. सहयोग । (सुरेश)
सच्चाई
सच्चाई वो दीपक है, जिसे अगर पहाड़ की चोटी पर भी रख दो तो… बेश़क रौश़नी कम हो, लेकिन दिखाई बहुत दूर से भी देता
दर्द / समस्या / प्रार्थना
???????????????????????????????????????????????????? “दर्द” एक संकेत है कि… *आप जिंदा हो*, “समस्या” एक संकेत है कि…. *आप मजबूत हो,* “प्रार्थना” एक संकेत है कि….. *आप अकेले नहीं
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