Category: डायरी

धर्म-चर्चा

धर्म-चर्चा से जरूरी नहीं कि आप आगे बढ़ेंगे, पर इतना अवश्य है कि आप पीछे नहीं जायेंगे ।

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दुखाभास

सुखाभास (सांसारिक/इंद्रिय सुखों को सुख मानना) की तरह दुखाभास भी होता है । दुखाभास = 1. दुखों को ओढ़ लेना 2. इच्छित वस्तु का ना

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अहम्

धागे के अहम् को बनाये रखने के लिये मोम अपना सर्वस्य दे देता है, फिर भी धागे का वहम् समाप्त नहीं होता, हम इनसे दूर

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मृत्यु

मृत्यु से डर लगता है कि उस पार ना जाने कैसा/क्या होगा ? तभी दरवाजा खुला और पालतु कुत्ता खुश होकर मालिक को चाटने लगा

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गलतियों से सीख

हमारी उम्र इतनी नहीं कि हम ख़ुद हर प्रकार की गलती कर सकें, इसलिये दूसरों की गलतियों से सीख लेना ही होगा । (यदि हम

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अच्छा/बुरा समय

दुर्योधन के पास अजेय योद्धा होते हुये भी हारने का कारण है – उसने अच्छे समय में उनको(अजेय योध्दाओं को) याद नहीं किया, इसलिये बुरे

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पानी

1. गर्म तवे पर ठंडा पानी डालोगे तो उड़ जायेगा, गर्म टिकेगा । सो गर्म पानी पियें । 2. भोजन ऐसा (सादा) करें जिसे पचाने

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धन

धन ज़रूरत के लिये, ज़रूरतमंदों के लिये, जोड़ने और छोड़ने के लिये नहीं । नाव को मंज़िल तक पहुँचाने के लिये, नाव में भरने/डुबाने के

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मंगल आशीष

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