Category: पहला कदम

यात्रा

अच्छा करते समय, अच्छा Feel…अर्हम् यात्रा ; अच्छा करके, कर्ता Feel …….अहम् यात्रा। मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान – 12 अगस्त)

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स्वाध्याय / तप

स्वाध्याय को परम तप कैसे कहा गया ? स्वाध्याय से ज्ञान और ज्ञान से एक क्षण में असंख्यात गुणी निर्जरा! पर किनकी ? यदि श्रावक

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वनस्पति

वनस्पतियों को तीन श्रेणी में बाँट सकते हैं… पहली जो हवा में झूलती रहती हैं। इनमें सबसे कम दोष होता है जैसे लौकी आदि। दूसरी

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चलित-भोजन

जब भोजन एक घर/ स्थान से दूसरे में ले जाया जाता है, रास्ते में भोजन के विकृत होने की संभावना हो जाती है, खासतौर से

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आहार मुद्रा

आहार के लिये जाते समय पाँचों उंगलियों को मिलाकर (मुनि कंधे पर, ऐलक/ क्षुल्लक हाथ लटकाकर) क्यों जाते हैं ? शायद इसलिये कि भोजन पाँचों

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करणानुयोग

करणानुयोग का ज्ञान घृतवर समुद्र के जल जैसा यानी रागद्वेष नहीं। आगे के सब समुद्रों का जल इक्षु रस जैसा होता है। मुनि श्री प्रणम्यसागर

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सामायिक आदि

सामायिक— समता संबंधी, श्रमणों के जीवन में, बारह और वैराग्य भावना आदि के द्वारा संसार के सही स्वरूप का चिंतन करना। सामयिक— समय संबंधी, श्रावकों

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कुन्दकुन्द स्वामी / विदेह

कुन्दकुन्द स्वामी विदेह नहीं गये थे। यहीं से भावों से वंदना की थी। गणधर जी ने आशीर्वाद दिया था। ऐलक श्री विवेकानन्दसागर जी

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क्षपक

सल्लेखना करने वाले को भी क्षपक तथा श्रेणी माणने वाले को भी? क्योंकि कर्मों का क्षय दोनों ही करते हैं, अपने-अपने तरीकों से। मुनि श्री

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मंगल आशीष

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