Category: पहला कदम

उपयोग

श्रावक श्रमण की तुलना में अधिक सत्य बोलते हैं। कैसे ? श्रावक से पूछो, “बुखार है?” श्रावक- “है।” किन्तु श्रमण कहेगा, “नहीं।” “पर शरीर तो

Read More »

व्रत / विरति

व्रत विधि है, विरति निषेध। आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी (विरति, व्रत का फल है)।

Read More »

माँगना

कल्पवृक्ष किसी से कुछ नहीं माँगते। जो अपने को मानते हैं/ अपने से ही माँगते हैं, वे ही केवलज्ञानी बनते हैं। क्षु. श्री सहजानन्द जी

Read More »

आत्मा

जो दिखती सी है पर दिखती नहीं, वह आत्मा है। चिंतन

Read More »

तीर्थंकर

दो और तीन कल्याणक वाले तीर्थंकरों में गुण ? अंतरंग तो सबमें अनन्त चतुष्टय हैं। बाह्य के गर्भ, जन्म के अतिशय नहीं होंगे। निर्यापक मुनि

Read More »

धर्मांधता

श्री गोपाचल (ग्वालियर) में सैकड़ों विशाल प्रतिमाओं का निर्माण धर्मांधता से सम्भव था। उनका विध्वंस भी धर्मांधता से ही सम्भव था। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी

Read More »

द्रव्य / पर्याय

द्रव्य तो सबका ज्ञानमय है। पाँचों ज्ञान सब में, प्रकट ज्ञानी के। पर्याय बदलने पर ही द्रव्य का मूल जैसे पत्थर में सोना‌, इंजीनियर तो

Read More »

साता

श्रावकों के असाता में पाप-बंध ही होता है (अपवादों को छोड़कर)। साता में पापबंध और पुण्यबंध, दोनों। चिंतन

Read More »

वैयावृत्ति

वैयावृत्ति अंतरंग तप क्यों ? क्योंकि इसमें मन की ग्लानि पर विजय, दूसरों के गुणों के प्रति आदर और मान गलन होता है। निर्यापक मुनि

Read More »

मंगल आशीष

Archives

Archives
Recent Comments

May 22, 2026

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930