Category: पहला कदम

मूलनायक

मूल –> मुख्य, जो प्रतिमा वेदी के बीच/ ऊपर विराजमान हो। मूलनायक का वर्णन शास्त्रों में नहीं मिलता। अकृत्रिम चैत्यालयों में तो एक वेदी पर

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अज्ञान

ज्ञान के पहले “अ” लगने पर अज्ञान। जीव के पहले “अ” लगने पर “अजीव। सो अज्ञान का संबंध अजीव से हुआ। जितनी अजीव की जानकारी,

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एकेंद्रिय

पाँचों एकेंद्रिय हमारे जीवन के आधार हैं। विडम्बना –> सबसे ज्यादा दोहना/ विराधना इन्हीं की करते हैं। हम तो इनसे क्षमा माँगने योग्य भी नहीं

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पापी / पुण्यात्मा

स्वर्ग 19 (16+3), नरक 7 ही, तो क्या पुण्यात्मा ज्यादा पापी कम होते हैं ? पुण्यात्माओं के महल आदि ज्यादा बड़े-बड़े होते हैं। नारकी एक-एक

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पहाड़ों की ऊँचाई

विदेह, भरत तथा ऐरावत क्षेत्रों में पहाड़ 5 हजार धनुष से ज्यादा ऊँचे नहीं होते। इसलिए भगवान जब विहार करते हैं तो ये रुकावट नहीं

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कषाय

हम सम्यग्दृष्टि हैं या मिथ्यादृष्टि, कैसे पता लगे ? यदि समय के साथ कषाय घट रही है तो सम्यग्दर्शन हो गया या होने वाला है,

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रसी

सप्ताह में 6 दिन रसों का त्याग बताया (मंगलवार – मीठा, बुधवार – घी, बृहस्पतिवार – दूध, शुक्रवार – दही, शनिवार – तेल, रविवार –

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दुस्वर

ज्ञानी के भी दुस्वर कर्मोदय के समय, उनकी हितकारी बात भी सुनना नहीं चाहते। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – 8/11 )

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निकांक्षित अंग

अनैतिक उपलब्धियों/ भोगविलास की इच्छा करना ही निकांक्षित-अंग में दोष है। सामान्य/ सांसारिक इच्छा रखने में दोष नहीं। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

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मंगल आशीष

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