Category: पहला कदम
पंचशील
बौद्ध मत का पाँचवाँ शील बताया है…. मद्यपान-विरति, जैन दर्शन में पांचवाँ……………………………… अपरिग्रह। ब्र. डॉ. नीलेश भैया
जैनदर्शन
जैनदर्शन न द्वैतवादी है, ना ही अद्वैतवादी है। द्वैतवादी संश्लेष तथा संयोग सम्बन्धों को मानते हैं, अद्वैतवादी दोनों को नहीं। जैनदर्शन तो इन दोनों सम्बन्धों
तीर्थंकरों की महिमा
तीर्थंकरों की महिमा…. श्री सोनागिर सिद्धक्षेत्र से मुनि नँगकुमार, अनँगकुमार जी मोक्ष गये। चन्द्रप्रभु भगवान का समवसरण आया। मूलनायक प्रतिमा चन्द्रप्रभु भगवान की ही है।
मीमांसा
दर्शन तीन प्रकार के – तत्त्व मीमांसा –> सृष्टि का निर्माण कैसे आदि। ज्ञान मीमांसा –> ज्ञान की सीमायें क्या हैं। आचार मीमांसा –> ये
समय
स्टेज पर दूसरे कार्यक्रमों की बहुलता तथा धर्मचर्चा के लिये समय बहुत कम रह जाने पर, आचार्य श्री विद्यासागर जी –> समय की कीमत करो,
भागदौड़
भागदौड़…. कुत्ता एक मिनट में 15 बार सांस लेता है, औसत आयु 10 वर्ष। कछुआ एक मिनट में 2 बार सांस लेता है, औसत आयु
कषायों की तीव्रता
किसी जीव का क्रोध अनंतानुबंधी का है, बाक़ी कषायें मंद दिखती हैं, पर बाकी कषायें भी आयेंगी मंद अनंतानुबंधी की श्रेणी में ही। क्योंकि कषायों
विकथा
विकथा 4 नहीं, 15 होती हैं…. स्त्री, धन, भोजन, नदी पर्वत से घिरे स्थान/ केवल पर्वतों से घिरे स्थान, राज, चोर, देश-नगर, खान, नट, भाट,
वैय्यावृत्त्य
आचार्य श्री भद्रबाहु जी की वैय्यावृत्त्य देवता भी करते थे। कैसे ? गर्मी/ प्यास ज्यादा होने पर बादल की छांव करके।
गर्भ कल्याणक
संस्कारों का महत्व बताने के लिए गर्भ-कल्याणक दो दिन मनाया जाता है। देवियाँ भगवान की माँ की सेवा में, गर्भ की रक्षा हेतु नहीं बल्कि
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