Category: पहला कदम

पुद्गल विपाकी

अगुरूलघु, उप/पर घात, रसादि, आतप, उद्योत, प्रत्येक/ साधारण, शुभ/ अशुभ, स्थिर/ अस्थिर आदि 62 प्रकृतियाँ पुद्गल विपाकी हैं। ऐसे चिंतन से रागद्वेष कम होता है

Read More »

द्रव्य / तत्त्व

सभी जीव द्रव्यों का तत्त्व तो एक ही है। पर चिंतन सबका नहीं, एक अपने जीव-तत्त्व का करना है। सो द्रव्य सब, तत्त्व एक। आर्यिका

Read More »

विपाक

विपाक = फलानुभूति। भेद –> जीव विपाक = फलानुभूति जीव को जैसे ज्ञानावरणादि। पुद्गल विपाक = फलानुभूति पुद्गल के माध्यम से जैसे नामकर्म। क्षेत्र विपाक

Read More »

पूजादि

पूजादि 6 आवश्यक, मोक्षमार्ग की पर्याय हैं। चिंतन

Read More »

उपयोग

श्रावक श्रमण की तुलना में अधिक सत्य बोलते हैं। कैसे ? श्रावक से पूछो, “बुखार है?” श्रावक- “है।” किन्तु श्रमण कहेगा, “नहीं।” “पर शरीर तो

Read More »

व्रत / विरति

व्रत विधि है, विरति निषेध। आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी (विरति, व्रत का फल है)।

Read More »

माँगना

कल्पवृक्ष किसी से कुछ नहीं माँगते। जो अपने को मानते हैं/ अपने से ही माँगते हैं, वे ही केवलज्ञानी बनते हैं। क्षु. श्री सहजानन्द जी

Read More »

आत्मा

जो दिखती सी है पर दिखती नहीं, वह आत्मा है। चिंतन

Read More »

तीर्थंकर

दो और तीन कल्याणक वाले तीर्थंकरों में गुण ? अंतरंग तो सबमें अनन्त चतुष्टय हैं। बाह्य के गर्भ, जन्म के अतिशय नहीं होंगे। निर्यापक मुनि

Read More »

धर्मांधता

श्री गोपाचल (ग्वालियर) में सैकड़ों विशाल प्रतिमाओं का निर्माण धर्मांधता से सम्भव था। उनका विध्वंस भी धर्मांधता से ही सम्भव था। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी

Read More »

मंगल आशीष

Archives

Archives
Recent Comments

May 27, 2026

June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930