Category: पहला कदम
ध्रुवता
दीपक का प्रकाश(पुद्गल), बुझने पर पुद्गल रूप धुआँ/ अंधकार रूप लेना, प्रकाश की ध्रुवता है। स्वयंभू स्तोत्र – 24
असाता
असाता करने से असाता का बंध होता है, चाहे वह धार्मिक क्रियाओं के लिए ही क्यों न हो । आधे जीवन तक असाता की तो
दर्शन
अन्य दर्शन… ईश्वर (अवतार) प्रेरित। जैन दर्शन… चारित्र प्रेरित, सामान्य आदमी/ गुरु/ अरिहंत द्वारा। ब्र. डॉ. नीलेश भैया
मकर संक्रांति
आज के दिन(मकर संक्रांति) भरत चक्रवर्ती को सूरज के अकृतिम चैत्यालय की पूजा करने के लिए, आने में देर हो गयी। जल्दी में नदी में
मकर संक्रांति
🔹 आज पतंग नहीं, कर्मों को उड़ाओ। 🔹 किसी की पतंग मत काटो, अपने कर्म काटो। 🔹 ये कैसा मजा है जिसमें निरीह पक्षियों का
जैन दर्शन
इस दर्शन में समुद्र मंथन नहीं, कि पानी बिलोकर अमृत निकाल लो। मोक्ष, पुरुषार्थ से ही मिलेगा सिर्फ़ कृपा से नहीं। ब्र. डॉ. नीलेश भैया
परिग्रह / सामायिक
परिग्रह भी 4 प्रकार का – द्रव्य, क्षेत्र, काल (ये समय/ मौसम प्रिय) तथा भाव का। इसी अपेक्षा से सामायिक भी 4 प्रकार की। मुनि
लोच
केशलोंच से बालों की जड़ें कमज़ोर हो जाती हैं। ऐसे ही व्यवहार में लोच होने से अहंकार कमजोर हो जाता है। ब्र. डॉ. नीलेश भैया
जैन धर्म
प्रसिद्ध पत्रकार खुशवंत सिंह नास्तिक थे। एक Interview में उन्होंने कहा…यदि धर्म अपना ही हो तो जैन धर्म अपनाना। इसकी नैतिकता उत्कृष्ट है। ब्र. डॉ.
राग-द्वेष
राग की बहुलता हो तो द्रव्य-दृष्टि कर लेना, द्वेष में पर्याय-दृष्टि। मुनि श्री मंगलसागर जी
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