Category: पहला कदम
अनर्थदण्ड विरत
अनर्थदण्ड विरत = मन, वचन और काय की कुचेष्टाओं का त्यागी। अनर्थ = निष्प्रयोज्य। दण्ड = मन, वचन और काय की कुचेष्टाएँ। विरत = उदासीन,
पद्मासन मूर्ति
प्राय: पद्मासन मूर्तियाँ क्यों ? तप भी इसी मुद्रा में ? पैर ज़मीन से नकारात्मक ऊर्जा लेते हैं। पद्मासन में पैर तथा हथेलियाँ ऊपर की
इन्द्रिय-विजय
रामकृष्ण मिशन के साधुओं ने आचार्य श्री विद्यासागर जी से पूछा… “इन्द्रिय-विजय कैसे करें?” “इन्द्रियों को इन्द्रियों का काम करने दो।” “वो तो हम करते
ज्ञान
सामान्यजन का ज्ञान प्राय: धारावाहिक/ पुनरावृत्ति वाला होता है। यही सही है (चाहे झूठ ही क्यों न हो) मिथ्याज्ञान है, क्योंकि संयोगपने से पैदा होता
चेतना
कर्म-फल चेतना का अनुभव… कि मैं हूँ। फल भोगना सुख-दु:ख की अनुभूति तो सब जीवों में होती है, कीड़ों में भी। कर्म-चेतना (कर्ता भाव) संज्ञियों
धर्मात्मा
धर्म शुरु में काँटों* से बचने को कहता है। आगे चलकर फूलों** से भी। चिंतन *अशुभ से। **शुभ/ सुख-सुविधा।
आहार
1991 के मुक्तागिरी के चातुर्मास में आचार्य श्री विद्यासागर जी ने मुनियों को सम्बोधन दिया… दुर्भाग्य है कि पंचमकाल में आहार के लिए रोज़ उठना
ज्ञान
कम से कम ज्ञान निगोदिया को। जिसे “नित्य उद्घाटित ज्ञान” कहते हैं। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – अध्याय 8)
ब्रह्मचर्य
ब्रह्मचर्य व्रत … आलम्बन सहित। ब्रह्मचर्य धर्म … आलम्बन रहित। (नीलेश भैया – सांगानेर)</span
जैन धर्म
जैन धर्म महान क्यों ? जैन धर्म ने भगवान बनाये। अन्य मतों में भगवान, धर्म बनाते हैं। आर्यिका सुयोग्यनंदनी माताजी
Recent Comments