Category: पहला कदम
नारियल
नारियल को श्रीफल क्यों कहते हैं ? जटाएँ हटाना –> केशलोंच का प्रतीक। जटाएँ हटने पर 3 आँखें दिखती हैं जो रत्नत्रय का प्रतीक हैं।
अभिषेक / प्रक्षालन
भगवान के अभिषेक तथा गुरु-चरण अभिषेक के जल को प्रक्षालन नहीं कहते। प्रतिमा अभिषेक के जल को “प्रतिमाभिषेक”, गुरु चरण अभिषेक के जल को “पद्माभिषेक”
मौखर्या……….परिभोगानर्थक्यानि
मौखर्या = ज़्यादा बकवास, खोटे विचार। परिभोगानर्थक्यानि = स्मृति न रहना। दोनों शब्द आसपास के/ एक जैसे लगते हैं पर इनमें अंतर भी साफ है।
धन / ज्ञान
एक देवता यदि आपको वरदान दे कि कल अंबानी बना दूंगा पर ज्ञान छीन लूंगा, तो लाभ क्या? अम्बानी होने का बोध ही न हो
भाव
1. औदयिक भाव….. भरपूर भोक्ता, जैसा मिला खाया। 2. औपशमिक भाव…. मिर्ची वाले भोजन में शक्कर मिलाकर। 3. क्षायोपशमिक भाव… बड़ी मिर्ची (सर्वघाती प्रकृति) निकालकर,
भय/अभय
शेर का बच्चा गीदड़ों के साथ रहकर भी सुखी रहता है, शेरों के पास भी सुखी। तो फ़र्क क्या हुआ? गीदड़ों के पास भयभीत रहता
भावना
वचन कैसे ? जैसा मेरा स्वभाव। मैं कहाँ ? जहाँ मेरा उपयोग। (तारण पंथ) किसी को पुण्य/ पाप फल उसकी भावनाओं से या निष्कर्ष से
धर्म
धर्म कैसे बढ़ाएँ ? धर्म क्या है ? वस्तु का स्वभाव ही धर्म है। अपने जीवन से विभाव कम करते जाएँ। स्वभाव प्रकट होता जाएगा
सम्यग्दर्शन के अंग
सम्यग्दर्शन के पहले 4 अंग/ भाव (निशंकितादि) स्वाश्रित हैं। अगले 4 (उपगूहनादि) पराश्रित। यदि पहले 4 संभाल लिए तो अगले 4 आसानी से संभल जाएँगे।
नि:शल्यो व्रती
नि:शल्यो व्रती…. इसमें अणुव्रती/ महाव्रती दोनों आ जाएँगे। मोक्ष का भाव रखने वाले के शल्य समाप्त हो जाती है। जैनेतर व्रत ले सकते हैं पर
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