Category: पहला कदम

कषायों की तीव्रता

किसी जीव का क्रोध अनंतानुबंधी का है, बाक़ी कषायें मंद दिखती हैं, पर बाकी कषायें भी आएँगी मंद अनंतानुबंधी की श्रेणी में ही। क्योंकि कषायों

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विकथा

विकथा 4 नहीं, 15 होती हैं…. स्त्री, धन, भोजन, नदी-पर्वत से घिरे स्थान/ केवल पर्वतों से घिरे स्थान, राज, चोर, देश-नगर, खान, नट, भाट, मल्ल,

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वैयावृत्य

आचार्य श्री भद्रबाहु जी की वैयावृत्य देवता भी करते थे। कैसे ? गर्मी/ प्यास ज़्यादा होने पर बादल की छाँव करके।

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गर्भ कल्याणक

संस्कारों का महत्व बताने के लिए गर्भ-कल्याणक दो दिन मनाया जाता है। देवियाँ भगवान की माँ की सेवा में, गर्भ की रक्षा हेतु नहीं बल्कि

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प्रमाद

प्रमाद…. कुशल (मंगलरूप, हितकारी कार्य) में अनादर। प्रमाद से ही व्यसन, व्रतों में दोष। प्रमाद होने पर विकथा आदि होने का नियम नहीं। लेकिन विकथा

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ज्ञान

दो अक्षर का (छोटा सा) “ज्ञान”, तीन तीन अक्षरों(बडों) वाले “दर्शन” तथा “चारित्र” के बीच जैसे माता पिता के बीच बच्चा, ताकि उछल-कूद न करे।

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मन वृद्ध

सब इंद्रियों की अपेक्षा अनिन्द्रिय मन सबसे वृद्ध और महत्वपूर्ण है। वह सब इंद्रियों को अपने अनुसार चलाना चाहता है, जैसे कुछ वृद्ध परिवार के

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प्रासुक

प्रासुक…. “प्र”…. प्रगत ( निकल जाना)। “असु”…”असवः (प्राण)। प्रासुक होने पर स्पर्श, रस, गंध, वर्ण –> बद‌ल जाएँ। जल गर्म/ उबालने से भी रस से

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कायक्लेश

कायक्लेश…. चलाकर(बुद्धिपूर्वक) काय को क्लेश देना। बाईस परिषहों में से एक। तप का भेद। उपसर्ग अचानक आते हैं, परीषह के लिए पहले से तैयार रहते

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विद्या गुरु मिल जाएँ

“…विनती हमारी है बड़े बाबा, विद्या गुरु मिल जाएँ…” – भजन (ब्र. सलौनी)। प्रश्न… गुरु तो स्वर्ग में, कैसे मिलें ? 1. हम ऐसा पुण्य

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मंगल आशीष

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