Category: पहला कदम

सोला

सोला में 16 तरह की शुद्धि…. अन्न शुद्धि… अन्न, जल, अग्नि, कर्ता शुद्धि। क्षेत्र… प्रकाश, वायु, स्थान, गन्ध शुद्धि। काल… ग्रहण, शोक, रात्रि, प्रभावना काल

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संसार / मोक्ष

संसार में रह कर आनंद आ रहा है तो मोक्ष कैसे ! संसार में रहकर आनंद में रह रहे हो तो संसार कैसे !! ये

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कुदेव

जहाँ भय वहाँ प्रीति नहीं। कुदेव से भय तो रहता ही है (नाराज़ होने पर परेशान करते हैं)। फिर उनसे प्रीति कैसे हो सकती है

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काय-क्लेश / परिषह / उपसर्ग

काय-क्लेश में चलाकर काय को क्लेश दी जाती है। परिषह आतीं हैं उन पर मुनिराज जय प्राप्त करते हैं। उपसर्ग अचानक आते हैं। निर्यापक मुनि

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ज्ञान / तटस्थता

ज्ञान तटस्थता के अनुपात में आता है। केवलज्ञान तक तो समझ आता है, बाद में प्रवचन के बारे में कैसे समझें ? गिलास भर जाने

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धर्म बढ़ाना

सांसारिक कार्यों को करते हुए धर्म कैसे बढ़ाएँ ? धर्म है क्या ? वस्तु का स्वभाव ही धर्म है। सांसारिक क्रियाएँ करते हुए वस्तुओं (जीव,

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सुखी-दु:खी

आगमानुसार जीव सुख-दु:ख का भोक्ता है। यह भी कहा… यदि सुखी-दु:खी माना तो मिथ्यात्वी! दोनों को कैसे घटित करें ? सम्यग्दृष्टि जीव भी सुख-दु:ख तो

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पुद्गल परावर्तन

पुद्गल परावर्तन दो प्रकार… कर्म पुद्गल परावर्तन। नोकर्म पुद्गल परावर्तन। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थसूत्र – अध्याय 8)

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मंगलाचरण

मंगलाचरण में 6 अधिकार (चीजें) होती हैं… जैसे द्रव्यसंग्रह के मंगलाचरण में… मंगल…जो पुण्य ले आए/ पापों को गलाये। यहाँ श्री ऋषभदेव भगवान का नाम।

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कर्मबंध

नो-कर्मबंध के हेतु -> परिवारजन/ शरीर। नो-कर्मबंध टूटने पर कर्मबंध टूटते हैं, कर्मबंध टूटने पर नो-कर्मबंध टूटते हैं। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थसूत्र – अध्याय

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मंगल आशीष

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