Category: पहला कदम
मंगलाचरण
मंगलाचरण में 6 अधिकार (चीजें) होती हैं… जैसे द्रव्यसंग्रह के मंगलाचरण में… मंगल…जो पुण्य ले आए/ पापों को गलाये। यहाँ श्री ऋषभदेव भगवान का नाम।
मित्रता
मित्रता निभाने से पुण्यबंध। मित्रानुराग से कषाय, पापबंध। मुनि श्री अध्यात्ममणि सागर जी (व्रती श्री लालमणि जी वरैया, ग्वालियर)
तत्व
कुण्डलपुर मंदिर जीर्णक्षीण तथा भूकंप से नुकसान होने पर नया बनाने की फैसले की, पुरातत्व विभाग ने आपत्ति की। आचार्य विद्यासागर जी… “आपका ध्यान पुरातत्व
सोला
सोला में 16 तरह की शुद्धि…. अन्न शुद्धि… अन्न, जल, अग्नि, कर्ता शुद्धि। क्षेत्र… प्रकाश, वायु, स्थान, गन्ध शुद्धि। काल… ग्रहण, शोक, रात्रि, प्रभावना काल
संसार / मोक्ष
संसार में रह कर आनंद आ रहा है तो मोक्ष कैसे ! संसार में रहकर आनंद में रह रहे हो तो संसार कैसे !! ये
कुदेव
जहाँ भय वहाँ प्रीति नहीं। कुदेव से भय तो रहता ही है (नाराज़ होने पर परेशान करते हैं)। फिर उनसे प्रीति कैसे हो सकती है
काय-क्लेश / परिषह / उपसर्ग
काय-क्लेश में चलाकर काय को क्लेश दी जाती है। परिषह आतीं हैं उन पर मुनिराज जय प्राप्त करते हैं। उपसर्ग अचानक आते हैं। निर्यापक मुनि
ज्ञान / तटस्थता
ज्ञान तटस्थता के अनुपात में आता है। केवलज्ञान तक तो समझ आता है, बाद में प्रवचन के बारे में कैसे समझें ? गिलास भर जाने
धर्म बढ़ाना
सांसारिक कार्यों को करते हुए धर्म कैसे बढ़ायें ? धर्म है क्या ? वस्तु का स्वभाव ही धर्म है। सांसारिक क्रियाएँ करते हुए वस्तुओं (जीव,
सुखी-दु:खी
आगमानुसार जीव सुख-दु:ख का भोक्ता है। यह भी कहा… यदि सुखी-दु:खी माना तो मिथ्यात्वी! दोनों को कैसे घटित करें ? सम्यग्दृष्टि जीव भी सुख-दु:ख तो
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