Category: पहला कदम

विदेह

संदेह होगा, देह है तो देहाती, विदेह हो जा। आचार्य श्री विद्यासागर जी

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मोह

राग-द्वेष मोह की ही संतान हैं। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी

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अकृत्रिम जिनालय

अकृत्रिम जिनालयों की पद्‌मासन मूर्तियाँ 500 धनुष की। प्रश्न… 500 धनुष शरीर या मूर्ति ? नंदीश्वर द्वीप पूजा में 500 धनुष “तन” लिखा है यानी

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नारियल

नारियल को श्रीफल क्यों कहते हैं ? जटायें हटाना –> केशलोंच का प्रतीक जटायें हटने पर 3 आँखें दिखती हैं जो रत्नत्रय की प्रतीक हैं।

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अभिषेक / प्रक्षालन

भगवान के अभिषेक तथा गुरु-चरण अभिषेक के जल को प्रक्षालन नहीं कहते। प्रतिमा अभिषेक के जल को “प्रतिमाभिषेक”, गुरु चरण अभिषेक के जल को “पद्माभिषेक”

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धन / ज्ञान

एक देवता यदि आपको वरदान दे कि कल अम्बानी बना दूंगा पर ज्ञान छीन लूंगा, तो लाभ क्या ? अम्बानी होने का बोध ही न

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भाव

1. औदयिक भाव….. भरपूर भोक्ता, जैसा मिला खाया। 2. औपशमिक भाव…. मिर्ची वाले भोजन में शक्कर मिलाकर। 3. क्षायोपशमिक भाव… बड़ी मिर्ची (सर्वघाती प्रकृति) निकालकर,

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भय/अभय

शेर का बच्चा गीदडों के साथ रहकर भी सुखी रहता है, शेरों के पास भी सुखी। तो फर्क क्या हुआ? गीदड़ों के पास भयभीत रहता

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भावना

वचन कैसे ? जैसा मेरा स्वभाव। मैं कहाँ ? जहाँ मेरा उपयोग। (तारण पंथ) किसी को पुण्य/ पाप फल उसकी भावनाओं से या निष्कर्ष से

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मंगल आशीष

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