Category: पहला कदम
शिखर जी
लगभग 30 साल पहले शिखर जी की यात्रा करते समय, मित्र साथ में था। आखिरी 9 किलोमीटर रह जाने पर उसके मुँह में कफ आ
श्री, ह्रीं… देवी
ये देवियाँ (श्री, ह्रीं, धृति, कीर्ति, बुद्धि, लक्ष्मी) भगवान की माँ की सेवा (क्रमश: शोभा, लज्जा, धैर्य, कीर्ति, बुद्धि, वैभव बढ़ाने) के लिये नियुक्त होती
तेरस
धन्य-तेरस, जब भगवान महावीर भगवान को ते*रस, बे रस लगने लगे थे, उनको नये रस आने लगे थे। ब्र. डॉ. नीलेश भैया * पुराने।
आस्था
आचार्य श्री विद्यासागर जी कहा करते थे.. किसी की आस्था पर चोट करना भी चोरी है। यह मिथ्यात्व है/ गलत है, ऐसा बार-बार कहने से
अहिंसा
शुद्धि के लिए जाते समय मुनिराज कागज की पुड़िया में बेसन ले जाते थे। 2013 में आचार्य श्री विद्यासागर जी ने कहा… कागज भी क्यों
हिंसानंदी
हिंसानंदी रौद्रध्यान यानी हिंसा में आनंद लेना। पर इसका उल्टा भी हिंसानंद होगा –> “आनंद के लिये हिंसा करना जैसे शिकार।” चिंतन
लिपि
भगवान वृषभनाथ ने अपनी बेटी ब्राह्मी को लिपि देवनागरी(विद्या) सिखाई थी, भाषा नहीं। दुर्भाग्य आज हम हिंदी को भी रोमन लिपि में लिख रहे हैं,
Multi-tasking
Multi-tasking तो सिर्फ़ केवलज्ञानियों की हो सकती है। सामान्य व्यक्ति में तो संभव ही नहीं क्योंकि उपयोग एक समय में एक ही टास्क पर लगता
देवों का नरक भ्रमण
क्या सीता का जीव सोलहवें स्वर्ग से नरक सम्बोधन के लिए गया था? भक्ति/प्रथमानुयोग के अनुसार कथन है, इसमें करणानुयोग को गौण कर दिया जाता
अहमिन्द्रों की धर्म-चर्चा
अहमिन्द्रों की धर्म-चर्चा अनंतकाल तक बिना दोहराये कैसे संभव ? उनकी चर्चा का विषय प्रथमानुयोग होता है। महापुरुषों की संख्या अनंत सो चर्चा भी अनंतकाल
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