Category: पहला कदम
भरत / बाहुबली
बाहुबली जी के दीक्षा के समय हालाँकि भरत मौजूद थे। पर उन्हें बाहुबली जी कि एक साल के उपवास/तप के नियम के बारे में पता
निगोद जाना/आना
तीव्र मिथ्यात्व/पाप निगोद जाने के कारण हैं। निकलने के कारण –> त्रस आयुबंध + कषाय की मंदता। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (शंका समाधान – 25)
जिन दर्शन/पूजा
जिन दर्शन…. जैनों का लक्षण है। जिन पूजा…..जैनों का आवश्यक है। मुनि श्री सुप्रभसागर जी
उदीरणा
श्रमण तथा श्रावक दोनों ही उदीरणा करते हैं: श्रमण पापकर्म की तथा श्रावक पुण्यकर्म की। श्रमण जितनी ज्यादा सर्दी सहेंगे, उतनी ज़्यादा पापकर्मों की उदीरणा
प्रीति
भय दिखाकर प्रीति कैसे हो सकती है ! कुदेवों से भय तो हो सकता है (मिथ्यादृष्टियों को), पर उनसे भी प्रीति कैसे हो सकती है
कल्याण
आगम समझ आता नहीं, हमारा कल्याण कैसे होगा ? कल्याण आगम जानने से नहीं, उस पर श्रद्धा रखने से होता है। तभी तो णमोकार समझ/
अनुयोग
बनतीं हैं भूमिकाएँ प्रथमानुयोग से, आतीं हैं योग्यताएँ करणानुयोग से, तब पकतीं हैं पात्रताएँ चरणानुयोग से, फिर आत्मा झलकती द्रव्यानुयोग से। समाधि भक्ति में क्रम
आत्महत्या
क्या राजा श्रेणिक जो क्षायिक सम्यग्दृष्टि, तीर्थंकर प्रकृति का बंध किये हुए थे, उन्होंने आत्महत्या की होगी ? कोई बाधा नहीं क्योंकि वे चौथे गुणस्थानवर्ती
गणधर के शिष्य
गणधर के शिष्य “गुणधर” (गुणों के धारक)। उत्तम – सम्यक् चारित्र के धारक। मध्यम – सम्यग्दर्शन के धारक। जघन्य – सिर्फ नाम के धारक जैसे
समवसरण
कुबेर समवसरण को विक्रिया से क्यों नहीं बना लेते ? Real का Feel नहीं आयेगा। भगवान के लिये नकली का प्रयोग ? भक्त्ति की उत्कृष्टता।
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