Category: पहला कदम
कायक्लेश
कायक्लेश…. चलाकर(बुद्धिपूर्वक) काय को क्लेश देना। बाईस परिषहों में से एक। तप का भेद। उपसर्ग अचानक आते हैं, परीषह के लिए पहले से तैयार रहते
विद्या गुरु मिल जाएँ
“…विनती हमारी है बड़े बाबा, विद्या गुरु मिल जाएँ…” – भजन (ब्र. सलौनी)। प्रश्न… गुरु तो स्वर्ग में, कैसे मिलें ? 1. हम ऐसा पुण्य
निर्माल्य
माली मेहनत करता है, बदले में मेहनताना निर्माल्य में नहीं आएगा। मन्दिर का सामान/ दुकान आदि हड़पना निर्माल्य में आएगा। मुनि श्री प्रमाणसागर जी
बच गये या मर गये
एक प्रसिद्ध फ़िल्म में डाकुओं के सरदार ने तीन डाकुओं को गोली मारी पर तीनों बच गये, तीनों बहुत खुश हुए। अचानक सरदार ने तीनों
सल्लेखना
क्षु. श्री जिनेंद्र वर्णी जी की सल्लेखना आचार्य श्री विद्यासागर जी के सानिध्य में चल रही थी। एक दिन आचार्य श्री सम्बोधन देने देर से
आचार्य श्री विद्यासागर जी के अंतिम प्रवचन से
पंच परमेष्ठी का Short Form –> “ओंकाराय नमो नमः”। आचार्य श्री विद्यासागर जी
स्व-पर कल्याण
आचार्य श्री ज्ञानसागर जी* फल (धर्म-पुरुषार्थ) खाकर चले गए। गुठली भी बोई (आचार्य श्री विद्यासागर जी)/ पौधे को सँवारा, विकसित भी कर गए। जिस पर
प्रमाद
प्रमाद जीतने के उपाय … विकथा –> शास्त्रानुसार भाषण या मौन। कषाय –> कलुषित भावों की निंदा करें/ क्षमा धारण करें। विषयासक्ति –> लोकनिंदा का
आयु
देव, नारकी तथा भोगभूमिज की आयु बहुत बड़ी-बड़ी, मनुष्य/ तिर्यंच की कम क्यों ? मनुष्य/ तिर्यंच संयम ले सकते हैं और संयम लेने के लिए
ज्ञान
ज्ञान तो बस ज्ञान है। माध्यम/ ग्रहण करने वाला सम्यक्/ मिथ्या हो सकता है। मुनि श्री मंगलसागर जी
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