Category: वचनामृत – अन्य

पैसा / पुण्य

क्या पैसा पुण्य से आता है ? नहीं, यदि पुण्य से आता होता तो साधु को पुण्यहीन मानना पड़ेगा! फिर ? पुण्य की Background में

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पाप

कषाय (क्रोध, माम, माया, लोभ) कारण है, पाप कार्य। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

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संयोग

लड्डू की सुंदरता/ सुगंधि/ क़ीमत तभी तक, जब तक खाने वाले से संयोग न हो। बाद में तो दुर्गति ही। क्षु.श्री सहजानन्द जी

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थकान

नीतिपूर्ण कार्यों को करने से थकान नहीं होती है। अनीतिपूर्ण कार्यों में ही थकान होती है। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

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गुरु

सोलर पैनल जैसे होते हैं गुरु। अपनी Energy ख़ुद पैदा करते रहते हैं। फ़र्क यह है कि इनकी Energy रात/ सोते में भी चार्ज होती

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आशीष / शाबाशी

शाबाशी अच्छे/ बुरे कामों पर भी। इससे अहंकार आता है। आशीष सिर्फ अच्छे कामों के लिये ही। इससे अहंकार घटता है। मुनि श्री प्रमाणसागर जी

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कर्म

कर्म चोर बहु फिरत हैं… यह कहावत सही नहीं है। कर्म तो साहूकार हैं, उनका कर्ज़ा कभी चुकता नहीं है। मुनि श्री मंगलानन्द सागर जी

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इच्छा

क्या भगवान भक्तों की ही इच्छा-पूर्ति करते हैं, या जो भी शरण में आता है, उसकी? भगवान किसी की भी इच्छा-पूर्ति नहीं करते। जो भी

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अच्छाई / सच्चाई

सामने वाले में अच्छाई दिखे तो उसे सच्चाई मानो (भरोसा, परखकर)। अपनी अच्छाई के पीछे सच्चाई परखो। परिवार/ समाज में सच्चाई को गौण कर अच्छाई

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आकांक्षा

कांक्षा का नुक़सान… संसार तथा परमार्थ दोनों में फल पर दृष्टि रहती है सो धर्म/ कर्त्तव्य पर कम हो जाती है। इससे विशुद्धि/ शांति भी

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मंगल आशीष

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May 17, 2026

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