Category: वचनामृत – अन्य
विचार
विचार कर्मों पर आधारित या पुरुषार्थ पर ? दोनों के संयोग से। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (शंका समाधान – 23)
ब्रह्मचर्य
संसार रूपी भ्रम को पहचान कर ब्रह्म को चरना/ आचरण करना ब्रह्मचर्य है। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी
परोपकार
एक दीपक दूसरे को प्रकाशित करते समय अपनी बाती/ घी/ प्रकाश नहीं देता फ़िर भी दूसरा प्रकाशित हो जाता है/ उसके जीवन से अंधकार समाप्त
रावण
क्या रावण को धर्मात्मा कहें क्योंकि वह विद्वान के साथ-साथ पूजा/पाठ भी बहुत करता था ? लेकिन उसका उपयोग सीता जी में था इसलिए वह
साधु / स्वादु
साधु को स्वादु होना चाहिए। जैसा भी मिले स्वाद लेकर खाना चाहिए। मुनि श्री मंगलानंद सागर जी
Thinking
शेर की +ve Thinking थी कि उस पर कोई मुसीबत नहीं आ सकती। लेकिन उसके पास Power Thinking नहीं थी, मुसीबत किसी पर भी आ
ज्ञानी / अज्ञानी
ज्ञानी अपराध होने पर सज़ा चाहता है/ मांगता है, मिलने पर खुश। अज्ञानी सज़ा मिलने पर जेल तोड़कर भागना चाहता है। जिन पर मुसीबत ज्यादा
भगवान कहाँ ?
वैदिक दर्शन में –> कण-कण में। जैन दर्शन में –> घट-घट में भगवान बनने की क्षमता। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
कषाय
चार कषायों में से पहली दो क्रोध और मान प्रत्यक्ष देखने में आती हैं, तीसरी मायाचारी कभी-कभी और चौथा लोभ तो समझ ही नहीं सकते/
यंत्र / मंत्र / तंत्र
यंत्र – Material का सहारा जैसे लाउड स्पीकर। मंत्र – अदृश्य शक्ति का सहारा लेकर कार्य सम्पादन। तंत्र – भावात्मक शक्ति का सहारा लेकर कार्य
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