Category: वचनामृत – अन्य

दान

पहले तात्कालिक लाभ को प्राथमिकता पर दीर्घकालीन ज्यादा महत्वपूर्ण। मंदिर आदि में (बोलियाँ आदि लेना) चार प्रकार के दानों के अलावा, धर्म प्रभावना के लिए

Read More »

धर्म

धर्म जीने की कला सिखाता है, साथ साथ मरने का सलीका भी। जैसे एक ही थाली से खाया भी जाता है, त्याग भी। आर्यिका अर्हम्

Read More »

धैर्य / आलस

धैर्य, क्षमतानुसार पुरुषार्थ करके बिना विकल्प के फल का इंतज़ार करना। क्षमतानुसार पुरुषार्थ न करके फल का इंतज़ार करना, आलस होता है। मुनि श्री प्रमाणसागर

Read More »

स्वाभिमान / अभिमान

स्वाभिमान के साथ जब अकड़ आ जाती है तब वह अभिमान का रूप ले लेता है। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (जिज्ञासा समाधान – 4.4.22)

Read More »

विवाह

धर्म प्रवाह प्रभावित हुई क्या बिना विवाह। आचार्य श्री विद्यासागर जी

Read More »

नकल

किसी की नकल करना आत्महत्या है।अपनी आत्मा की हत्या ही तो है! हर व्यक्ति के अपने-अपने मौलिक गुण होते हैं,उनकी हत्या ही तो होगी! मुनि

Read More »

उत्साह

उदासीनता से न तो संसार चलता है, न ही परमार्थ। जब इनमें उत्साह रहता है, तब दोनों उत्सव बन जाते हैं। मुनि श्री सौरभसागर जी

Read More »

पापी भी सुखी ?

साइकिल पैडल मारने पर चलती है। लेकिन ढलान पर बिना पैडल मारे भी! क्योंकि पहले काफी पैडल मारकर अच्छी गति प्राप्त कर ली थी। ढलान

Read More »

फटना

दूध जितना फटता है (दूध से दही, मक्खन, घी आदि) उतनी कीमत बढ़ती है। हम जितना फटते हैं उतनी कीमत घटती है। मुनि श्री विनम्रसागर

Read More »

पाप

पाँच प्रकार के पापों का फल उत्तरोत्तर अधिक-अधिक है- हिंसा से ज्यादा झूठ का क्योंकि इसमें हिंसा भी आ जाती है। ऐसे ही चोरी, कुशील,

Read More »

मंगल आशीष

Archives

Archives
Recent Comments

July 28, 2025

May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031