Category: वचनामृत – अन्य
नारियल
नारियल को “श्रीफल” इसके अनेक गुणों के कारण कहते हैं। अन्य फलों से इसमें एक और विशेषता होती है कि यह रस अलग से बनाता
क्षत्रिय
जो पापों पर घात करे, उन्हें जीते वह क्षत्रिय । मुनि श्री अजितसागर जी (सबसे बड़े दुश्मन तो पापकर्म ही हैं)।
वर्ण लाभ/संकर
वर्ण लाभ… दोनों वर्णों को लाभ जैसे दूध और पानी। वर्ण संकर… दूध में नीबू जैसे देहाकर्षण से शादी/ गुणवत्ता को गौण करके। मुनि श्री
मूल से जुड़ना
जब तक पुष्प मूल से जुड़ा रहता है तब तक ही उसकी सुंदरता और सुगंधि बनी रहती है। मुनि श्री विनम्रसागर जी
पुण्य अर्जन
पुण्य अर्जन का सरल तरीका –> पुण्य के फल का त्याग। मुनि श्री प्रमाणसागर जी
सहजता
शरीर, सम्पत्ति तथा समय हमको सहजता से प्राप्त हुआ, सहजता प्राप्त करने के लिये। विडम्बना… हमने इसे ही असहजता प्राप्त करने के लिये उपयोग कर
दर्द
कांटे में तकलीफ़/दर्द नहीं, शरीर में भी नहीं। जब कांटा शरीर में लगता है तब दर्द होता है। आत्मा में दु:ख नहीं, शरीर में भी
Charming
अंग्रेजी शब्द “Charm”, चर्म से बना है। तो “Charming” का क्या अर्थ बना ? त्वचा को महत्व ! मुनि श्री प्रणम्यसागर जी
Senior Citizen
Senior Citizen होने पर बड़ी-बड़ी तीर्थयात्राएँ नहीं हो पातीं तो क्या करें ? Senior होने से पहले बड़ी-बड़ी यात्राएँ पूरी कर लें। आचार्य श्री विद्यासागर
दुर्जन
दुर्जन, जिसको अवगुण ही दिखायी दें/ उनकी Publicity करे, गुणों पर दृष्टि ही न जाये। महादुर्जन जो गुणों को भी अवगुण मानकर फैलाये। निर्यापक मुनि
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