Category: वचनामृत – अन्य
सच्ची मिठास
ना काफ़ी (मिठास), नाही फीका, सच्ची मिठास प्राकृतिक। काफ़ी मिठास – जलेबी में पर मायाचारी का प्रतीक, फीका मिठास – रसगुल्ले में पर मिलावटी (पनीर
लोरी
संसारी माँ बच्चों को लोरी सुलाने के लिये सुनाती है। धर्म-माँ* बड़ों को जगाने के लिये। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी *जिनवाणी (धार्मिक ग्रंथ)/ गुरु-वाणी।
आदर्श
खाओ-पीओ, चखो मत; देखो-भालो, तको मत; हँसो-बोलो, बको मत; खेलो-कूदो, थको मत। मुनि श्री मंगलानन्दसागर जी
आत्मा / अनात्मा
प्राय: दूसरों से अधिक से अधिक सुख लेना चाहते हैं। जैसे मिठाई मेरी थाली में है पर Common में से पहले और ज्यादा से ज्यादा
हार का कारण
दुर्योधन के पास बड़ी सेना, दोनों गुरु, बड़े-बड़े गुरुजन, फिर भी हारा। कारण ? गुरुजनों से चाहता था। पांडव गुरुजनों को चाहते थे। निर्यापक मुनि
भगवान बनना
भगवान बनने के लिए (श्री रयणसार के अनुसार) – पहले भक्त बनो। किसके ? देव-शास्त्र-गुरु के, देव/ गुरु प्रपंच रहित, शास्त्र विवाद/ विरोध रहित हैं।
ईर्ष्या
ईर्ष्या की ख़ासियत – जिनसे करोगे उसकी प्रगति होगी (सामने वाला Competition में और मेहनत करता है)। प्रेम किया तो वह अकर्मण्य हो जायेगा (जैसे
सीख
धूप में छाँव का अनुभव करते हो या छाँव में धूप का डर रहता है ! डरेगा वह नहीं जिसके जीवन में भगवान/ गुरु की
वात्सल्य
अपनी समर्थता से सधर्मी की असमर्थता को समर्थता में बदलना । निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
निंदा / पूजा
निंदा के साथ पूजा करना, स्वनिंदा बिना पूजा से कम महत्वपूर्ण है। स्वनिंदा से कर्मों का नाश होता है। कहा जाता है –> परनिंदा करने
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