Category: वचनामृत – अन्य

अनन्त

अनन्त संख्या को कैसे समझें ? अनन्त वह जिसमें आय न हो, सिर्फ़ व्यय ही व्यय हो पर संख्या अनन्त रहे, जैसे भविष्य आज अनन्त

Read More »

सुख

  संसारी सुख… हर सुख के पीछे दु:ख जैसे भोजन बनाने में दु:ख, उसे सुख की आशा कि परिवारजन खुश होंगे। दु:ख का प्रतिकार ही

Read More »

नॉनवेज क्यों नहीं ?

नॉनवेज में हिंसा का कारण बताने पर कुतर्क दिए जायेंगे। समझायें कि यह गंदा होता है क्योंकि इसमें खून, मांस, हड्डी आदि होते हैं। जबकि

Read More »

आधुनिक उपकरण

क्या भगवान के ज्ञान में आधुनिक उपकरण मोबाइल आदि नहीं था? यदि था तो उन्होंने ऐसे सुविधाजनक उपकरणों के बारे में बताया क्यों नहीं? पिता

Read More »

परिग्रह

पाँचों पाप रोग-रूप हैं। हिंसा, झूठ, चोरी और कुशील के तो लक्षण दिखते हैं और उनका इलाज सम्भव है, पर परिग्रह के लक्षण अंतरंग हैं।

Read More »

अंगदान

अंगदान… करुणा, अभय, औषधि (निरोग करना) दान में आयेगा। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (जिज्ञासा समाधान – 5-4-22)

Read More »

विकास

संसार तथा परमार्थ में विकास के लिये … एक आदर्श होना चाहिये जैसे भगवान। आदर्श को समझने के लिये गुरु का अवलम्बन ज़रूरी है। उनके

Read More »

छोटों को महत्व

छोटों को महत्व… इकाई से ही दहाई आदि बड़ी-बड़ी संख्यायें बनतीं हैं। इकाई को महत्व नहीं देंगे तो दहाई बनेगी कैसे ! मुनि श्री सुप्रभसागर

Read More »

पढ़ाई

ज्यादा पढ़े तो घर से जाये, कम पढ़े तो हल* से जाए। *खेती के काम के नहीं, ज्ञान बिना खेती कैसे होगी ! निर्यापक मुनि

Read More »

जैन साधु

जैन साधु की पहचान, पदयात्री तथा करपात्री। पदयात्री – जीवनपर्यन्त पैदल चलते हैं। करपात्री – जीवनपर्यन्त हाथ में भोजन करना/ बर्तनों में नहीं। मुनि श्री

Read More »

मंगल आशीष

Archives

Archives
Recent Comments

December 28, 2025

June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930