Category: वचनामृत – अन्य
पुण्य अर्जन
पुण्य अर्जन का सरल तरीका –> पुण्य के फल का त्याग। मुनि श्री प्रमाणसागर जी
सहजता
शरीर, सम्पत्ति तथा समय हमको सहजता से प्राप्त हुआ, सहजता प्राप्त करने के लिये। विडम्बना… हमने इसे ही असहजता प्राप्त करने के लिये उपयोग कर
दर्द
कांटे में तकलीफ़/दर्द नहीं, शरीर में भी नहीं। जब कांटा शरीर में लगता है तब दर्द होता है। आत्मा में दु:ख नहीं, शरीर में भी
Charming
अंग्रेजी शब्द “Charm”, चर्म से बना है। तो “Charming” का क्या अर्थ बना ? त्वचा को महत्व ! मुनि श्री प्रणम्यसागर जी
Senior Citizen
Senior Citizen होने पर बड़ी-बड़ी तीर्थयात्राएँ नहीं हो पातीं तो क्या करें ? Senior होने से पहले बड़ी-बड़ी यात्राएँ पूरी कर लें। आचार्य श्री विद्यासागर
दुर्जन
दुर्जन, जिसको अवगुण ही दिखायी दें/ उनकी Publicity करे, गुणों पर दृष्टि ही न जाये। महादुर्जन जो गुणों को भी अवगुण मानकर फैलाये। निर्यापक मुनि
शोधन
भोजन में बाल आदि आने पर उसे निकाल कर बाहर फेंक देते हैं। कटु वचन/घटना को ? उसे तो सर पर बैठा लेते हैं, वह
पुरुषार्थ
प्राय: लोग कहते हैं –> हम पुरुषार्थ नहीं कर सकते हैं। पर हम भूल जाते हैं कि मनुष्य गति, अच्छा कुल आदि पाने के लिये
स्थिति
परिस्थिति जो “पर” में स्थित हो। यह आपके हाथ नहीं। लेकिन पूरा पुरुषार्थ करने तथा आशावान रहने से स्व-स्थिति बदल जाती है। तब परिस्थिति भी
धर्म
धर्म स्व-आश्रित ही नहीं, पर निमित्तक भी है। साधुजन भी गृहस्थों की भोजन व्यवस्था लेते हैं। काया के आश्रित तो साधु तथा गृहस्थ दोनों रहते
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