Category: डायरी

निस्वार्थी

व्यक्ति स्वार्थी है, यह पता चलता है नज़दीकियाँ बढ़ने के बाद; और नि:स्वार्थ है, यह पता चलता है उससे दूरियाँ बढ़ने के बाद। (सुरेश)

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गुण / अवगुण

यदि बगीचे में गंदगी के ढेर ज्यादा हों तो वे खुशबूदार पौधों को पनपने नहीं देंगे और यदि 2-4 पनप भी गये तो उनकी खुशबू

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भ्रम

आज चिड़िया का बच्चा खिड़की के कांच में अपनी छवि देख-देख कर चौंच मार रहा था। बार-बार भगाने पर भी नहीं भाग रहा था। उसके

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ज्ञानी

कितनी भी मुसीबतें आयें, ज्ञानी कभी विचलित नहीं होते। सूरज का ताप कितना भी प्रचंड हो समुद्र कभी सूखता नहीं/ कम भी नहीं होता। (हितेष

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सुख / दु:ख

हमें दु:ख वे ही दे सकते हैं जिनसे हमने सुख की चाहत की हो। (अनुपम चौधरी)

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पति/पत्नि और धर्म

पति को वैदिक परम्परा में ‘पति-परमेश्वर’ कहते हैं। पर वह ‘परमेश्वर’ कैसे ? पत्नि जीवन काल में पति को धर्म में लगाये रखती है, उनके

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Happiness

Shakespeare – I always feel happy because I don’t expect anything from anyone. Before you Speak, Listen. Before you Write, Think. Before you Spend, Earn.

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मन / शरीर

चक्की के दो पाट, एक गतिमान दूसरा स्थिर, तभी अनाज पिसता है; दोनों गतिमान रहेंगे तो कार्य(आटा पिसना) होगा क्या ? जब मन स्थिर, शरीर

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मनुष्य

मनुष्य पर्याय इतनी देर को मिलती जैसे लम्बी अंधेरी रात में कुछ क्षणों के लिये बिजली कोंध जाती है। उतनी देर में हमें सुई में

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मंगल आशीष

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