Category: डायरी

गुरु / साधु

श्रावकों का कल्याण करते समय – गुरु, अपना कल्याण करते समय – साधु । निर्यापक मुनि श्री वीरसागर जी

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गज-स्नान

पूजादि करके क्रोधादि करने पर दोष ज्यादा लगता है, जैसे… हाथी पर धूल तो लगती/गिरती रहती है पर वह नहाने के बाद यदि धूल में

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क्षमा

क्षमा करने से “क्रोध” समाप्त, क्षमा माँगने से “मान” समाप्त । (मंजू)

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हौसला

उम्मीदों का दामन थामा है तो हौसलों का भी थामे रहना; जब नाकामियाँ चरम-सीमा पर होतीं हैं, तब कामयाबीयाँ बहुत करीब होतीं हैं । (मंजू)

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धर्मात्मा

जो पुण्य-कर्मों में आगे, और पाप-कर्मों में (सबसे) पीछे रहे । जो बिना बोली (लगाये) खूब बोल दे, वह धर्मात्मा । मुनि श्री प्रमाण सागर

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कृपा / पुरुषार्थ

भक्त… प्रभु ! बस मेरी एक करोड़ रुपए की लौटरी निकलवा दो । प्रभु… टिकट का नम्बर बता ! भक्त…टिकट तो खरीदी नहीं है ।

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नियति और हम

एक निवाला पेट तक पहुंचाने का…नियति  ने क्या ख़़ूब इंतजाम किया है… अगर गर्म है, तो हाथ बता देते हैं ; सख़्त है, तो दांत

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रिश्ते

???????????????????????????????? रिश्तों में झुकना कोई अज़ीव बात नहीं, सूरज भी तो ढल जाता है, चाँद के लिए ! जीवन के कुछ संबंध ऐसे होने चाहिए

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मंगल आशीष

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