Category: डायरी

धर्म

भोजन दो तरह से – पथ्य रूप = ये खाना/ये नहीं खाना, स्वभाव रूप = स्वस्थ अवस्था में, आनंद आता है । इसी तरह –

Read More »

भोजन

गृहस्थ को भी भोजन माँग कर नहीं खाना चाहिये, ना ही परोसी हुई के अलावा माँगना चाहिये । अन्य कारणों के अलावा यह स्वाभिमान का

Read More »

आत्मा

आत्मा में स्पर्श/स्वाद/गंध/वर्ण नहीं होता, पर आत्मा ही स्पर्श/स्वाद/गंध/वर्ण को महसूस करती है । चिंतन

Read More »

नज़र लगना

यह तंत्र-विद्या का विषय है, जैसे कोई मज़ाक में कह दे – “डाकू आ गये”, तो पसीना आने लगता है । आधार नहीं है, पर

Read More »

अनेकांत

अनेकांत अनेक दृष्टिकोंण नहीं, अनिर्णयात्मक भी नहीं, बल्कि समग्र (पूर्ण) दृष्टि ।

Read More »

शरीर

शरीर स्वर्णयुक्त पाषाण है, मूल्यवान है । तपा लिया तो शुद्ध स्वर्ण निखर आता है, बहुमूल्य की प्राप्ति हो जाती है । निमित्त ना मिलने/पुरुषार्थ

Read More »

भगवान और भाग्य

भगवान और भाग्य का हमारे जीवन में Role कब आता है ? जब हमारा Role समाप्त हो जाता है, तब उनका Role शुरू होता है

Read More »

मंगल आशीष

Archives

Archives
Recent Comments

July 7, 2020

March 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031