प्रश्न :- वजन बढ़ जाए, तो क्या करें ?

उत्तर :-तन का बढे़ तो व्यायाम,
मन का बढे़ तो ध्यान,
और
धन का बढे़ तो दान ।

(अपूर्वश्री)

बिना संयम के काले बाल वालों पर भरोसा मत करना ;
Army area में Civilian का जाना वर्जित होता है ।
श्रावकों की सुनो मत/मानो मत, श्रमण को अपनी बात सुनानी चाहिये/श्रावकों से मनवानी चाहिये ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

“B” से “Birth”
और
“D” से “Death”
इन दोनों में से एक भी हमारे हाथ में नहीं है,
परन्तु
“B” और “D” के बीच में होता है “C”
“C” से “Choice”… ये हमारे हाथ में है,
जीवन कैसे जीना है, ये हमारे हाथ में है ।
“वर्तमान” को आनंद से जीओ,
“भूतकाल” को भूल जाओ,
“भविष्य”को कुदरत पर छोड़ दो ।

(सुरेश)

उपकार करके यदि कह दिया तो वह व्यापार हो गया ।
जब सीता जी को वनवास दिया तब उनके मन में यह भाव भी नहीं आया कि मैंने राम को वनवास में साथ दिया था ।
ज्ञानी उपकार को कर्त्तव्य मानता है ।

मुनि श्री सुधासागर जी

गुरु/भगवान को पाकर अहोभाग्य अनेकों बार माना, फिर कल्याण क्यों नहीं हुआ ?
मार्ग तो मिला पर मंज़िल नहीं, क्योंकि गुरु हमें पाकर धन्य नहीं हुये; माता-पिता, समाज, धर्म, देश धन्य नहीं हुए ।

मुनि श्री सुधासागर जी

परिस्थितियों से नहीं, परिणामों से डरो,
परिस्थितियाँ तो थोड़े समय के लिये निर्मित होती हैं,
परिणाम स्थायी प्रभाव छोड़ते हैं ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

चित्र के साथ जब “वित्त”*  जुड़ जाता है तब वह चित्र, विचित्र बन जाता है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

* जब चित्र(कला) से पैसा जुड़ जाता है, तब कला व्यवसाय बन जाती है/ अपना सौंदर्य खो देती है ।

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