गुरु और समुद्र दोनों ही गहरे हैं,
पर दोनों की गहराई में एक फ़र्क है….
समुद्र की गहराई में इंसान डूब जाता है,
और
गुरु की गहराई में इंसान तर जाता है ।

(मंजू)

कुत्ते की दुम का स्वभाव टेड़ा रहना है, यदि सीधी हो जाये तो कुत्ता पागल हो जाता है ।
आपको क्या स्वीकार है ?
टेड़ी पूँछ या पागल कुत्ता, जो अपने लिये तथा आपके लिये भी घातक होगा !

मुनि श्री अविचल सागर जी

सैना के पुल पर चलते समय, उनके मार्च की लय तोड़ दी जाती है । वरना मज़बूत पुल के भी टूटने का अंदेशा रहता है ।
सोचें ! यदि सामुहिक प्रार्थना एक साथ/ एक लय में की जाये तो उसमें कितनी ऊर्जा पैदा होगी !

चिंतन

वेद बिना संवेदना के साथ पढ़ने से सिर्फ अपनी वेदना समझ आयेगी ।
जिसके अंदर संवेदना है उसे वेद का ज्ञान तो हो ही जायेगा और सबकी वेदना भी समझ आयेगी ।

(यश – बड़वानी के प्रश्न का उत्तर)… मुनि श्री प्रमाणसागर जी

दीपक को जलना है, हवा को चलना है, दीपक बुझता है ।
दोष हवा का नहींं, दोनों का अपना अपना स्वभाव है ।
दीपक क्या करे ?
बस ! दीपक अपने आसपास चिमनी लगा ले, वही हवा उसे प्रकाशित बने रहने के लिये Oxygen भी देगी ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

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यदि हवाएं मौसम की गर्मी समाप्त कर सकती हैं, तो..यकीन कीजिए,
प्रार्थना भी मुसीबत के पल ख़त्म कर सकती है ।

हम सभी की खुशियों के लिए प्रार्थना करें ।

(अनुपम चौधरी)

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एक मुकाम जिंदगी में ऐसा भी आता है,
“क्या भूलना है” बस यही याद रह जाता है ।

(सुरेश)

और यह जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण मुकाम होता है,
मेरी जिंदगी में आ चुका है,
भूलने में प्रयत्नरत भी हूँ ।

प्रभु के दरबार में कहते हो झोली भर दो,
जबकि कहना चाहिये – झोली छुड़ा दो ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

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