Tension is who you think you should be.
Relaxation is who you are.

जीव रक्षा क्यों, आत्मा तो कभी मरती नहीं ?

ताकि मनुष्यादि अपना आत्मकल्याण करके दु:खों से मुक्ति पा सकें ।
पर कीड़े-मकोड़े/पेड़-पौधे तो आत्मा को जानते भी नहीं, तो कल्याण कैसे करेंगे ?
असहाय की रक्षा करके, दया के भावों से अपना आत्मकल्याण कर सकते हैं न !

आचार्य श्री विद्यासागर जी

मनुष्य यंत्रों की सहायता लेकर भी भटक जाता है ।
पक्षी हजारों किलोमीटर बिना यंत्रों के अपने गंतव्य पर पहुँच जाते हैं, क्योंकि वे लीक/परम्परा पर चलते हैं ।

धागे के अहम् को बनाये रखने के लिये मोम अपना सर्वस्य दे देता है, फिर भी धागे का वहम् समाप्त नहीं होता, हम इनसे दूर कैसे रहें ?
“मैं” बुरा नहीं, आवश्यक है;
“मैं कुछ हूँ” का वहम् बुरा है ।
वहम् ही अहम् को पैदा करता है ।
“अर्हम्” को पहचान लो तो वहम् भी नहीं और अहम् भी नहीं ।

पूजा/आहार में शुद्ध धोती-दुपट्टा पहनने से बाह्य शुद्धता के साथ साथ अंतरंग शुद्धता/शक्ति बढ़ जाती है ।
जैसे पुलिस वाला यदि सादा कपड़ों में हो और उससे झगड़ा किया तो कम सज़ा, पर वही यदि वर्दी में हो तो !

मुनि श्री सुधा सागर जी

मृत्यु से डर लगता है कि उस पार ना जाने कैसा/क्या होगा ?
तभी दरवाजा खुला और पालतु कुत्ता खुश होकर मालिक को चाटने लगा ।
कुत्ते को बस इतना मालूम था कि उस पार उसका मालिक है,
और क्या/कैसा है ! उसकी उसे कोई जिज्ञासा/डर नहीं ।

पारुल – दिल्ली

हमारी उम्र इतनी नहीं कि हम ख़ुद हर प्रकार की गलती कर सकें, इसलिये दूसरों की गलतियों से सीख लेना ही होगा ।
(यदि हम अपनी प्रगति तेज करना चाहते हों और गलतियों के जाल से बचना चाहते हों, तो)

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

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