????????????कुछ तो चाहत होगी, इन बूँदों की भी;
वरना…
कौन छूता है ज़मीं को, आसमाँ पर पहुँच कर !????????????

???????? (मंजू) ????????

स्वाभिमान से विनम्रता बढ़ती है, अभिमान में घटती है ।
स्वाभिमान में दोनों हाथ पीछे से आगे लाना है (पीछे वालों को साथ लेकर चलना), अभिमान में आगे से पीछे (सबको पीछे करके आगे बढ़ना) ।

मुनि श्री सुधासागर जी

कहते हैं – उतने पैर पसारिये, जितनी चादर होय, वरना मच्छर काटेंगे ।
तो क्या भाग्य के भरोसे पैर सिकोड़कर ही पड़े रहें ?
नहीं, चादर को लंबा करने का पुरुषार्थ करने से किसने मना किया !

एक बार गांधी जी General Class में यात्रा कर रहे थे ।
एक गाँव वाला आया और गांधी जी को धक्का मार कर बैठ गया और गाँधी-बाबा का भजन गाने लगा ।

हम भी आत्मा आत्मा का नाम रटते रहते हैं पर अज्ञानतावश आत्मा को पहचानते नहीं ।

भक्ति अंजुरी

आदिनाथ  भगवान का जन्मदिन श्रावकों के लिए विशेष महत्व का है । क्योंकि उन्होंने ही सर्वप्रथम जीवन  चलाने की पद्धति (खेती, व्यापार, कला, रक्षा आदि) सिखाई थी ।

बलवान निमित्त का कर्तव्य है कि वह कमज़ोर निमित्त को झूठ बोलने के लिये मज़बूर ना करे ।
जैसे उधारी वापस ना कर पाने वाले के सामने न पड़े ।

ब्र.नीलेश भय्या

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