दु:खी ना होना ही, सुखी होना है ।
सुखी रहना ही धर्म है ।

(धर्मेंद्र)

बिना अनुमति दूसरे की चीज़ लेना चोरी,
पर बिना अनुमति, दूसरे की वस्तु के ग्रहण का, भाव भी नहीं करना, अचौर्य – धर्म ।

गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

बंदर के हाथ हीरा पड़ गया, खाकर देखा, फेंक दिया ।
हीरा रो पड़ा !!
गुरु – मूल्य तभी है जब उसका ज्ञान हो तथा उसका उपयोग हो ।
क्या हम मनुष्य पर्याय का मूल्य जानते हैं ?
यदि जान भी गये हैं तो क्या उसका सदुपयोग कर रहे हैं ??

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April 8, 2022

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