ग्रहस्थ होना एक स्थिति है,
सदग्रहस्थ होना गुण है,
जिससे जीवन की सार्थकता है ।

श्रेष्ठता जन्म से नहीं आती ,
गुणों के कारण निर्माण होती है ।
दूध- -दही- -छाछ- -घी
सब एक ही कुल के होते हुए भी,
सब के मूल्य अलग अलग होते हैं ।

(आर.के.गुप्ता)

अच्छे लोगों की भगवान…
अच्छी (बड़ी) परीक्षा लेता है,
परन्तु साथ नहीं छोड़ता,
और
बुरे लोगों को भगवान…
बहुत कुछ देता है,
परंतु साथ नहीं देता |

(धर्मेंद्र)

हीरे का उपयोग यदि हीरे जैसा ना करें तो कंकड़ और हीरे में फ़र्क़ क्या रहा ?

मनुष्य और जानवर में क्या फ़र्क़ रह गया ?

मुनि श्री विशालसागर जी

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