Month: May 2026

व्रत / विरति

व्रत विधि है, विरति निषेध। आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी (विरति, व्रत का फल है)।

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विकल्प

जिसको विकल्पों में रस नहीं, उसे रसों का विकल्प नहीं। आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी

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माँगना

कल्पवृक्ष किसी से कुछ नहीं माँगते। जो अपने को मानते हैं/ अपने से ही माँगते हैं, वे ही केवलज्ञानी बनते हैं। क्षु. श्री सहजानन्द जी

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मज़ा / आनंद

मज़ा… संसार पर आश्रित। अल्प समय का। *आनंद.. गुरु/ भगवान के निमित्त/ निकटता/ उनकी सेवा करने से।   मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र –

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आत्मा

जो दिखती सी है पर दिखती नहीं, वह आत्मा है। चिंतन

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तीर्थंकर

दो और तीन कल्याणक वाले तीर्थंकरों में गुण ? अंतरंग तो सबमें अनन्त चतुष्टय हैं। बाह्य के गर्भ, जन्म के अतिशय नहीं होंगे। निर्यापक मुनि

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इष्ट / अनिष्ट

इष्ट के साथ अनिष्ट भी जुड़ा रहता है जैसे प्रवचन इष्ट, इसमें अवरोध अनिष्ट। बचपन में माँ इष्ट, बड़े होकर माँ अनिष्ट। मुनि श्री प्रणम्यसागर

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धर्मांधता

श्री गोपाचल (ग्वालियर) में सैकड़ों विशाल प्रतिमाओं का निर्माण धर्मांधता से सम्भव था। उनका विध्वंस भी धर्मांधता से ही सम्भव था। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी

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पैसा / पुण्य

क्या पैसा पुण्य से आता है ? नहीं, यदि पुण्य से आता होता तो साधु को पुण्यहीन मानना पड़ेगा! फिर ? पुण्य की Background में

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मंगल आशीष

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May 21, 2026