Month: May 2026
ज्ञान
कोरे काग़ज़ पर सही पता….सम्यग्ज्ञान, कोरे काग़ज़ पर ग़लत पता…मिथ्याज्ञान। चिंतन
पाप
कषाय (क्रोध, मान, माया, लोभ) कारण है, पाप कार्य। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
द्रव्य / पर्याय
द्रव्य तो सबका ज्ञानमय है। पाँचों ज्ञान सब में, प्रकट ज्ञानी के। पर्याय बदलने पर ही द्रव्य का मूल जैसे पत्थर में सोना, इंजीनियर तो
संयोग
लड्डू की सुंदरता/ सुगंधि/ क़ीमत तभी तक, जब तक खाने वाले से संयोग न हो। बाद में तो दुर्गति ही। क्षु.श्री सहजानन्द जी
साता
श्रावकों के असाता में पाप-बंध ही होता है (अपवादों को छोड़कर)। साता में पापबंध और पुण्यबंध, दोनों। चिंतन
भक्त से भगवान
भक्त से भगवान… भगवान के सामने बोलो/ अनुभव करो… “दासोहम्”। अगले कदम पर “उदासोहम्” (संसार से)। अंत में… “सोहम्”। आचार्य श्री विद्यासागर जी
वैयावृत्ति
वैयावृत्ति अंतरंग तप क्यों ? क्योंकि इसमें मन की ग्लानि पर विजय, दूसरों के गुणों के प्रति आदर और मान गलन होता है। निर्यापक मुनि
थकान
नीतिपूर्ण कार्यों को करने से थकान नहीं होती है। अनीतिपूर्ण कार्यों में ही थकान होती है। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
द्रव्य / तत्त्व
जीव द्रव्य अनन्त हैं, जीव तत्त्व एक। मुनि श्री प्रमाणसागर जी
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