Month: May 2026

विदेह

संदेह होगा, देह है तो देहाती, विदेह हो जा। आचार्य श्री विद्यासागर जी

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कृतघ्न

कृत = किया हुआ। हन = हंता/ विनाशक। कृतघ्न = जो किए गए उपकार को नकार दे। (कमल कांत)

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मोह

राग-द्वेष मोह की ही संतान हैं। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी

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अकृत्रिम जिनालय

अकृत्रिम जिनालयों की पद्मासन मूर्तियाँ 500 धनुष की। प्रश्न… 500 धनुष शरीर या मूर्ति ? नंदीश्वर द्वीप पूजा में 500 धनुष “तन” लिखा है यानी

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विचार / विकार

विचारों की यदि दिशा भटक जाए तो वह विकार बन जाते हैं। एक बुढ़िया की कुटिया पड़ोसी ने हड़प ली। बुढ़िया ने निवेदन किया कि

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नारियल

नारियल को श्रीफल क्यों कहते हैं ? जटाएँ हटाना –> केशलोंच का प्रतीक। जटाएँ हटने पर 3 आँखें दिखती हैं जो रत्नत्रय का प्रतीक हैं।

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पुरुषार्थ / भाग्य

पुरुषार्थ पहले या भाग्य ? सुभाष भाग्य से ही पुरुषार्थ कर पाते हैं। तब और ज्यादा अच्छा भाग्य बन जाता है, फिर ज्यादा पुरुषार्थ कर

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सिद्ध

गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी… एक बार सिद्ध बनने पर वापस कभी नहीं आ सकते हैं। जैसे घी कभी दूध नहीं बन सकता। मुनि श्री

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प्रचलित वस्तुएँ

कुम्हार अपने 5 गधों पर 5 सामग्रियाँ Overload करके रोज़ाना बेचने जाता था। अत्याचार –> राजा आदि के लिए। अहंकार –> सेठ आदि, नये धनपतियों

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मंगल आशीष

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May 6, 2026