Category: डायरी

ध्यान / सेवा

ध्यान का अर्थ है…भीतर से मुस्कुराना, और सेवा का अर्थ है…इस मुस्कुराहट को औरों तक पँहुचाना.. (सुरेश)

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शुद्धता

शुद्धता तो होती है विचारों में, आदमी कब पवित्र होता है ! फूलों में भी कीड़े पाये जाते हैं, पत्थरों में भी हीरे पाये जाते

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कर्म

कर्म तो निर्जीव होते हैं, उन्हें ठीक करने के लिये क्या करें ? “करनी” ठीक करें, कर्म अपने आप ठीक हो जायेंगे ।

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धर्म-श्रवण

धर्म-श्रवण निर्लोभी से ही सुनें, निर्मोही होकर/निर्लोभी बनने के लिये ।

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लक्ष

अगर व्यक्ति को पता न हो कि किस ओर जाना है, तो उसे हवा की हर दिशा अपने विरुद्ध लगेगी ।

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भूल / भगवान

“भूल” और “भगवान” मानों तो ही दिखेंगे । (जब मानोगे कि भगवान महावीर ने आज के दिन पावापुर से मोक्ष प्राप्त किया था) ???????? अनुपम

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मंगल आशीष

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